अनूप दुबे, कटनी। जिले के ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में मौसम का एक बेहद अजीब और चौंकाने वाला रूप देखने को मिला है। गुरुवार दोपहर को जहां एक तरफ लोग चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी से बेहाल थे, वहीं अचानक मौसम बदला और तेज बारिश शुरू हो गई। इस बेमौसम बरसात से आम जनता को गर्मी से भले ही कुछ पलों की राहत मिली हो लेकिन अन्नदाता के लिए यह बारिश आफत बनकर बरसी है। पकी-पकाई फसलों पर मंडराते संकट को देखकर क्षेत्र के किसानों की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं।

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कटाई के वक्त बारिश से फसल सड़ने का बढ़ा खतरा

ढीमरखेड़ा मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों किसानों की गर्मी के सीजन की फसलें पककर पूरी तरह तैयार खड़ी हैं। कई खेतों में कटाई का काम चल रहा है या होने वाला है। ऐसे नाजुक वक्त में धूप के साथ हुई इस तेज बारिश ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

किसानों को सबसे बड़ा डर इस बात का सता रहा है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश का यह दौर जारी रहा तो उनकी मेहनत से सींची गई फसल खेतों में ही सड़ जाएगी।

एक महीने से जारी है आंधी-तूफान का दौर, बेबस हुआ अन्नदाता

स्थानीय किसानों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले करीब एक महीने से लगातार मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। आए दिन तेज आंधी, तूफान और अचानक होने वाली बूंदाबांदी ने पहले ही फसलों को नुकसान पहुंचाया है। अब इस तेज बारिश ने रही-सही कसर पूरी कर दी है, जिससे किसान खुद को असहाय महसूस कर रहा है।

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उमस और बारिश के कॉम्बिनेशन से मौसमी बीमारियों का बढ़ा प्रकोप

मौसम में आ रहे इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर भी पड़ने लगा है। चिलचिलाती गर्मी के ठीक बाद हो रही बारिश के कारण उमस का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, जिससे मौसमी बीमारियों के बढ़ने का अंदेशा गहरा गया है। क्षेत्र में लगातार बदलते इस गर्म-सर्द मौसम की वजह से सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी के मरीजों की संख्या में अचानक भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

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