दिल्ली में सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई। दिल्ली के कुल करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं किए गए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह प्रक्रिया घर-घर जाकर किए गए सत्यापन के आधार पर की गई है। ड्राफ्ट रोल में करीब 97.5 लाख मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जबकि 47.7 लाख नाम इसमें नहीं हैं। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के लगभग हर तीन में से एक पंजीकृत मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने इस बड़े पैमाने पर नामों के बाहर होने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर सरकार और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए तंज कसा है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि SIR के तहत दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आ गई है। उन्होंने दावा किया कि करीब 1.5 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख लोगों के नाम सूची में नहीं हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत सरकार बेवजह जनसंख्या को लेकर परेशान हो रही है। केजरीवाल ने लिखा कि SIR के जरिए चुनाव आयोग देश की जनसंख्या को 140 करोड़ से घटाकर 50 करोड़ कर देगा।
CEO ने बताया- नाम छूटा है तो ऐसे करें दावा
उधर, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, वे फॉर्म-6 और संबंधित दस्तावेजों के जरिए अपना दावा दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए 30 सितंबर 2026 तक आवेदन करने का मौका दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि पात्र व्यक्ति का नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सकता। दावा दाखिल करने के बाद संबंधित दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाएगी।
29 अक्टूबर तक चलेगी जांच और निपटारे की प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच की जाएगी। इस दौरान संबंधित लोगों को नोटिस जारी करने और दावों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगी। दावा-आपत्ति और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को जारी की जाएगी। ऐसे में जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं हैं, उनके पास निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा दाखिल कर नाम शामिल कराने का अवसर है।
ड्राफ्ट रोल में 97.5 लाख मतदाता
निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक, ड्राफ्ट मतदाता सूची में उन करीब 97.5 लाख लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनके गणना प्रपत्र SIR अभियान के दौरान प्राप्त हुए और डिजिटल माध्यम से स्वीकार किए गए। दिल्ली में SIR की प्रक्रिया 30 जून से 17 अगस्त तक चली। इस दौरान दिल्ली के कुल 1,45,10,299 मतदाताओं में से करीब 67.18 प्रतिशत के गणना फॉर्म डिजिटल माध्यम से भरे गए।
47.7 लाख मतदाताओं के नाम क्यों नहीं हैं?
बाकी करीब 47.7 लाख मतदाताओं को ‘ASDDO’ श्रेणियों के तहत ‘अनुपलब्ध’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इनमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने और अन्य श्रेणियों में आने वाले मतदाता शामिल हैं। इसी वजह से इन मतदाताओं के नाम फिलहाल ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि पात्र मतदाता हमेशा के लिए मतदाता सूची से बाहर हो गया है। पात्रता साबित करने वाले आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित समयसीमा में दावा दाखिल किया जा सकता है। जांच और निपटारे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल किया जा सकता है।
67.18 प्रतिशत फॉर्म डिजिटल माध्यम से भरे गए
SIR अभियान के दौरान दिल्ली में मतदाताओं के गणना फॉर्म जुटाने और उन्हें डिजिटल माध्यम से स्वीकार करने की प्रक्रिया चली। 30 जून से 17 अगस्त तक चले अभियान में कुल मतदाताओं में से करीब 67.18 प्रतिशत के फॉर्म डिजिटल माध्यम से भरे गए। हालांकि, डिजिटलीकरण का दायरा दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर एक जैसा नहीं रहा। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटल फॉर्म भरने का प्रतिशत काफी अलग रहा।
रोहिणी में सबसे ज्यादा, तुगलकाबाद में सबसे कम
आंकड़ों के मुताबिक, रोहिणी विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 83.43 प्रतिशत गणना फॉर्म डिजिटल माध्यम से भरे गए। वहीं, तुगलकाबाद में डिजिटल फॉर्म का आंकड़ा सबसे कम 52.15 प्रतिशत रहा। इससे साफ है कि SIR प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटल माध्यम से फॉर्म जमा करने की दर में काफी अंतर रहा।
घर-घर जाकर किया गया गणना अभियान
मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र मतदाताओं का सत्यापन करने के लिए SIR के तहत घर-घर जाकर गणना अभियान चलाया गया था। इस दौरान मतदाताओं से गणना फॉर्म प्राप्त किए गए और उन्हें डिजिटल माध्यम से स्वीकार किया गया। जिन मतदाताओं के फॉर्म अभियान के दौरान प्राप्त नहीं हो सके, उनके लिए भी नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का रास्ता खुला रखा गया है।
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