Kerala BJP councillors Oath Controversy: संविधान और ईश्वर की जगह देवी-देवताओं और नेताओं के नाम पर शपथ लेने के मामले में केरल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने देवी-देवताओं और नेताओं के नाम पर शपथ लेने वाले 20 बीजेपी पार्षदों की शपथ को ‘अवैध’ ठहराया है। हाईकोर्ट ने कहा कि शपथ केवल कानूनी प्रारूप में ही होनी चाहिए। केरल हाईकोर्ट ने अब इन भाजपा पार्षदों को चार हफ्ते के भीतर दोबारा शपथ लेने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि शपथ लेने की प्रक्रिया में त्रुटि होने के बावजूद उनका निर्वाचन वैध बना रहेगा।

तिरुवनंतपुरम नगर निगम (Thiruvananthapuram Corporation) के 20 भाजपा पार्षदों ने संविधान और ईश्वर की जगह देवी-देवताओं और नेताओं के नाम पर शपथ ली थी। इसे लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई थी। मामला केरल हाईकोर्ट तक पहुंच गया। अब कोर्ट ने फैसला सुना दिया है।

जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 भाजपा पार्षदों की शपथ को अवैध घोषित करार दिया। स्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन ने फैसले में कहा कि कानून के मुताबिक, शपथ केवल दो तरीके से ली जा सकती है। ‘ईश्वर के नाम पर’ या ‘सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान’। कोर्ट ने कहा शपथ लेते समय किसी खास देवता, भारत माता, किसी नेता या शहीद का नाम जोड़ने की इजाजत नहीं है। जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने कहा कि नागरिकों को किसी भी देवी-देवता की पूजा करने या किसी भी धर्म का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन कानून में शपथ के प्रारूप में किसी प्रकार का जोड़ या बदलाव स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने निर्देश दिया कि इन पार्षदों और ग्राम पंचायत सदस्य के लिए चार हफ्ते के भीतर कानून के तहत दोबारा शपथ दिलाने की व्यवस्था की जाए।

क्या था शपथ विवाद का मामला?

दरअसल, तिरुवनंतपुरम में 20 पार्षदों ने अलग-अलग हिंदू देवताओं, भारत माता और शहीदों के नाम पर शपथ ली थी। वहीं, एक दूसरे मामले में पलक्कड़ जिले की एक ग्राम पंचायत सदस्य ने ‘ईश्वर की कृपा से ओमन चांडी के नाम पर’ शपथ ली थी। केरल हाई कोर्ट ने कहा कि इसमें एक्स्ट्रा कुछ भी नहीं जोड़ा जा सकता।

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