पटना। भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच हुई एक मुलाकात इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। एक पॉडकास्ट के दौरान खेसारी ने खुलासा किया कि कैसे अखिलेश यादव ने उन्हें राजनीति की जटिलताओं से दूर रहकर अपने कला क्षेत्र में ही सक्रिय रहने की सलाह दी थी।

​अखिलेश यादव: एक राजनेता से कहीं बढ़कर

​खेसारी लाल यादव ने अखिलेश यादव के साथ अपने संबंधों को बहुत ही व्यक्तिगत और आत्मीय बताया। उन्होंने कहा, मैं अखिलेश भैया को एक नेता के रूप में नहीं बल्कि एक बेहतर इंसान के तौर पर देखता हूं जो मानवीय संवेदनाओं को समझते हैं। खेसारी के अनुसार जब भी उनकी अखिलेश से बात हुई है उन्होंने कभी उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया। बल्कि उन्होंने खेसारी को यही सलाह दी कि उनकी छवि एक कलाकार के रूप में ही सबसे अच्छी है। अखिलेश का मानना है कि खेसारी का स्वभाव उस दुनिया के लिए नहीं है, जहां कूटनीति और छल की प्रधानता होती है।

​राजनीति की कड़वी सच्चाई और खेसारी का अनुभव

​खेसारी लाल यादव का राजनीति से मोहभंग होने के पीछे का कारण उनका पिछला अनुभव है। वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद के टिकट पर छपरा से चुनाव लड़कर हारने के बाद, उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। इस दौरान खेसारी ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि राजनीति उन लोगों के लिए नहीं है जो सच बोलना पसंद करते हैं।
​उन्होंने स्पष्ट किया, राजनीति में वही लोग टिक सकते हैं जो झूठे वादे करना और लोगों को गुमराह करना जानते हैं। मैं एक जिम्मेदार और ईमानदार व्यक्ति हूं, शायद इसीलिए मैं इस खेल में फिट नहीं बैठता।

​अब कभी चुनाव नहीं लड़ूंगा

​भले ही खेसारी सार्वजनिक मंचों पर इसे एक शिष्टाचार मुलाकात बता रहे हों, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उनकी निष्ठा अब बदल चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में नितिन नवीन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने खेसारी लाल यादव काफी भावुक दिखे। उन्होंने हाथ जोड़कर स्पष्ट कर दिया कि वे भविष्य में अब कभी कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे और खुद को पूरी तरह से राजनीति से दूर रखना ही उचित समझते हैं।
​खेसारी का यह बयान न केवल उनके प्रशंसकों के लिए एक संदेश है, बल्कि यह उस हताशा को भी दर्शाता है जो एक कलाकार को राजनीति के उतार-चढ़ाव देखने के बाद महसूस होती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने इस फैसले पर कितना अडिग रहते हैं।