कुरुक्षेत्र: पुलिस की वर्दी सिर्फ कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर इंसानियत निभाने का भी नाम है। कुरुक्षेत्र में तैनात हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच की सब इंस्पेक्टर सुमन ने इसका एक भावुक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने रेलवे स्टेशन पर मिले एक मूक बधिर बालक को करीब तीन महीने की लगातार कोशिशों के बाद उसके परिवार से मिलवा दिया।
बताया गया कि जून महीने में शाहाबाद रेलवे स्टेशन पर एक बच्चा मिला जो ना तो बोल सकता था और ना ही सुन सकता था। बालक को बाल संरक्षण प्रक्रिया के तहत लाड़वा स्थित बाल अनाथ आश्रम में रखा गया। जब इसकी जानकारी सब इंस्पेक्टर सुमन को मिली तो उन्होंने मामले को सिर्फ एक औपचारिक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा और खुद आश्रम पहुंचकर बालक से संपर्क बनाने का प्रयास किया।
बालक बोल और सुन नहीं सकता था, इसलिए उसके बारे में जानकारी जुटाना आसान नहीं था। सुमन ने उसकी काउंसलिंग कर किसी तरह उसके नाम के तौर पर कृष्णा और उसके एक दोस्त के बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने उपलब्ध जानकारी को देशभर की क्राइम ब्रांच की टीमों के ग्रुपों में साझा किया, ताकि बालक के परिवार तक पहुंचा जा सके।
करीब तीन महीने तक चली इस कोशिश का आखिरकार सुखद परिणाम सामने आया। मध्य प्रदेश के दतिया से कृष्णा के पिता लाड़वा स्थित बाल अनाथ आश्रम पहुंचे और अपने बेटे को पहचान लिया। लंबे समय बाद पिता और बेटे का मिलन भावुक कर देने वाला रहा।
सब इंस्पेक्टर सुमन ने कहा कि जब कोई गुमशुदा बच्चा अपने परिवार से दोबारा मिलता है तो उस खुशी को शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में बच्चे को उसके परिवार तक पहुंचाना ही सबसे बड़ी संतुष्टि है।
कृष्णा को उसके पिता के साथ देखकर सुमन की तीन महीने की मेहनत भी सफल साबित हुई। यह मामला बताता है कि पुलिस की वर्दी के पीछे संवेदनशीलता और इंसानियत का चेहरा भी मौजूद है।
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