लखीमपुर खीरी. निघासन तहसील क्षेत्र में मोहाना नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ एक बार फिर बाढ़ और कटान का खतरा गहराने लगा है. जसनगर और नया पिंड समेत 26 गांवों की करीब 35 हजार आबादी पर संकट मंडरा रहा है. सबसे दर्दनाक स्थिति उन 37 परिवारों की है, जिनके घर वर्ष 2024 में नदी के कटान में समा गए थे. दो साल यानी करीब 730 दिन बीतने के बाद भी इन परिवारों को स्थायी रूप से रहने के लिए जमीन नहीं मिल सकी है.
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इनमें से करीब 28 से 30 परिवार आज भी गांव के किनारे झुग्गियां बनाकर रहने को मजबूर हैं. प्रशासन की ओर से मकान क्षतिग्रस्त होने पर प्रभावित परिवारों को मुआवजा जरूर दिया गया, लेकिन उनके लिए स्थायी आशियाने की व्यवस्था नहीं हो सकी. अब मोहाना नदी ने फिर कटान शुरू कर दिया है और इस साल भी दो घर इसकी चपेट में आ चुके हैं.
2024 में नदी में समा गए थे 37 घर
नया पिंड और जसनगर गांव मोहाना नदी के सबसे करीब बसे हैं. वर्ष 2024 में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद दोनों गांवों में भीषण कटान हुआ था. नया पिंड के 28 और जसनगर के 9 घर नदी में समा गए थे. इसके साथ ही किसानों की कई एकड़ जमीन और फसलें भी बर्बाद हो गई थीं. मकान गंवाने वाले परिवारों को नुकसान के आधार पर मुआवजा मिला, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि पैसा मिलने से उनकी सबसे बड़ी समस्या खत्म नहीं हुई. उनके पास आज भी सुरक्षित तरीके से रहने के लिए जमीन नहीं है.
झोपड़ियों में गुजर रही जिंदगी, बारिश में टपकता है पानी
कटान पीड़ित परिवार सड़क और गांव के किनारे झुग्गियां बनाकर जीवन गुजार रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान झोपड़ियों में पानी टपकता है. कई परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है. नया पिंड के वीर सिंह ने भावुक होकर स्थायी आवास की व्यवस्था कराने की मांग की. वहीं गुरुवचन सिंह ने वृद्धावस्था पेंशन जैसी मदद की जरूरत बताई. रम्मो कौर ने बताया कि बारिश में झोपड़ी से पानी टपकता है और आसपास तेंदुए घूमने का भी डर बना रहता है.
प्रशासन कर रहा बचाव, ग्रामीण मांग रहे स्थायी समाधान
नया पिंड ग्राम प्रधान प्रगट सिंह के मुताबिक मोहाना नदी लगातार कटान कर रही है. उन्होंने बताया कि 2024 में 28 घर नदी में बह गए थे और इसकी जानकारी अधिकारियों को कई बार दी गई. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें हर साल मुआवजे की बजाय स्थायी जमीन और सुरक्षित आशियाना चाहिए. ग्रामीण बूटा सिंह और चंदन ने बताया कि इस बार भी कई घरों पर खतरा मंडरा रहा है. उनका आरोप है कि कटान के समय अधिकारी आते हैं और अस्थायी तौर पर बोरियां लगाकर चले जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा.
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26 गांवों पर बाढ़ का असर पड़ने की आशंका
निघासन क्षेत्र के 26 गांव मोहाना नदी के प्रभाव में आते हैं. नदी का जलस्तर बढ़ने से इन गांवों में रहने वाले हजारों लोगों की चिंता बढ़ गई है. वर्ष 2024 में बाढ़ और कटान से सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि बर्बाद हुई थी. इस बार भी ग्रामीण नदी के बढ़ते पानी को देखकर डरे हुए हैं.


