संजय वाणी, आलीराजपुर। मध्य प्रदेश के जोबट स्थित कम्पोजिट देशी-विदेशी मदिरा दुकान नंबर-02 पर एमआरपी से ज्यादा वसूली का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने शराब दुकान पर पहुंचकर मनमानी वसूली का विरोध किया। इस पूरे घटनाक्रम ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दुकान पर बीयर की बोतल 200 रुपये में बेची जा रही थी, जबकि उसकी वास्तविक एमआरपी 167 रुपये थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत तत्काल आबकारी अधिकारी से की। आरोप है कि शिकायत मिलते ही आबकारी अधिकारी ने दुकान पर मौजूद मैनेजर को फोन लगाया, जिसके बाद वही बीयर अचानक 167 रुपये में देना शुरू कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि यदि शिकायत के बाद शराब 167 रुपये में दी जा सकती है तो फिर पहले 200 रुपये क्यों वसूले जा रहे थे। ग्रामीणों ने इसे आदिवासी और गरीब लोगों से खुली लूट बताया।

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फोन आया और दाम बदल गए

स्थानीय लोगों का कहना है कि जोबट आबकारी अधिकारी मोहित बिड़ला के फोन के बाद दुकान का रवैया अचानक बदल जाना कई बड़े सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता नहीं पहुंचते तो लोगों से लगातार ज्यादा पैसे वसूले जाते रहते।

दुकान पर नहीं लगी रेट लिस्ट

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि दुकान पर रेट लिस्ट तक नहीं लगाई गई है, जिससे ग्राहकों को शराब की वास्तविक कीमत की जानकारी नहीं मिलती। इसी का फायदा उठाकर ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।

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गांव-गांव तक शराब सप्लाई के आरोप

क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि फोर व्हीलर और टू व्हीलर वाहनों के जरिए गांव-गांव तक शराब सप्लाई की जा रही है। देर रात तक चलने वाली इस गतिविधि को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

आबकारी विभाग और ठेकेदार सवालों के घेरे में

पूरे मामले में आबकारी अधिकारी और शराब ठेकेदार दोनों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी दुकान पर यदि खुलेआम एमआरपी से ज्यादा वसूली हो रही थी तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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