नई दिल्ली। कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा (Swarna Kanta Sharma) के खुद को मामले से अलग करने के बाद अब यह केस नई बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया है। दिल्ली हाई कोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई Manoj Jain करेंगे। जानकारी के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal), मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) समेत आम आदमी पार्टी के 6 नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू किए जाने के बाद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था। अब अवमानना मामले की सुनवाई जस्टिस नवीन चावला (Navin Chawla) और जस्टिस रविंदर दुडेजा (Ravinder Dudeja) की खंडपीठ करेगी। अदालत मंगलवार को दोनों मामलों पर सुनवाई करेगी।

गुरुवार को स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज के अलावा दुर्गेश पाठक और विनय मिश्रा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। अदालत ने यह कार्रवाई कथित तौर पर न्यायिक प्रक्रिया और अदालत की गरिमा से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू की है। आदेश जारी करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने नियमों का हवाला दिया और कहा कि अब इस मामले की सुनवाई किसी अन्य बेंच द्वारा की जाएगी। इसके बाद उन्होंने खुद को मामले से अलग कर लिया।

अवमानना केस में भी सुनवाई

एक ओर जहां शराब घोटाला केस की नई बेंच के सामने सुनवाई शुरू होगी, वहीं दूसरी तरफ आपराधिक अवमानना मामले की भी औपचारिक सुनवाई शुरू होने जा रही है। अवमानना मामले को जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। अदालत अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के छह नेताओं के खिलाफ मामले की सुनवाई करेगी।इन नेताओं में मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज के अलावा दुर्गेश पाठक और विनय मिश्रा के नाम भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, अदालत का दायरा केवल नेताओं तक सीमित नहीं रह सकता। जांच के दौरान उन लोगों को भी नोटिस या कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है जिन्होंने यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वीडियो अपलोड किए थे, जिनमें स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं।

CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

पूरे विवाद की शुरुआत फरवरी के अंत में उस समय हुई, जब ट्रायल कोर्ट अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में CBI की जांच पर तीखी टिप्पणियां की थीं। अदालत ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश भी दिए थे। इसके बाद CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। मामला जब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में सूचीबद्ध हुआ तो अरविंद केजरीवाल ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मामले को किसी दूसरी बेंच को ट्रांसफर करने की मांग की थी।

हालांकि, चीफ जस्टिस की ओर से यह मांग अस्वीकार कर दी गई। इसके बाद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में रिक्यूजल याचिका दायर की। इस याचिका में उन्होंने न्यायाधीश से खुद को मामले की सुनवाई से अलग करने का अनुरोध किया। बाद में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आम आदमी पार्टी के छह नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया और नियमों का हवाला देते हुए खुद को मामले से अलग कर लिया।

केजरीवाल ने अपनी रिक्यूजल याचिका में आरोप लगाया था कि उन्हें जस्टिस शर्मा की अदालत में न्याय मिलने को लेकर संदेह है। उन्होंने हितों के टकराव का मुद्दा उठाते हुए यह भी दावा किया कि न्यायाधीश कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े एक संगठन के कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। इसी आधार पर उन्होंने मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की थी। हालांकि, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने रिक्यूजल याचिका खारिज कर दी और मामले की सुनवाई जारी रखी। इस बीच सोशल मीडिया पर न्यायाधीश को लेकर कई पोस्ट, टिप्पणियां और वीडियो वायरल होने लगे। आरोप है कि कुछ वीडियो एडिट कर साझा किए गए और उनमें न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आम आदमी पार्टी के 6 नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया।

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