लखनऊ. राजधानी लखनऊ में आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर से जुड़े मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने आयोग के अध्यक्ष को भेजे गए प्रत्यावेदन में कहा कि विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रस्तावित प्रवर्तनात्मक कार्रवाई केवल कानूनी नहीं, बल्कि मानवाधिकारों से जुड़ा भी एक महत्वपूर्ण विषय है. उन्होंने आयोग से इस मामले में निष्पक्ष, विधिसम्मत और संविधान के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.
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‘कानून के तहत कार्रवाई हो, लेकिन प्राकृतिक न्याय का भी पालन जरूरी’
अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में कहा कि यदि किसी निर्माण में कानूनी अनियमितता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है. हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि ऐसी कार्रवाई संविधान, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों, विधिसम्मत प्रक्रिया (ड्यू प्रोसेस), प्रशासनिक निष्पक्षता और अनुपातिकता के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि किसी के अधिकारों का अनावश्यक हनन न हो.
विद्यार्थियों और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा की मांग
प्रत्यावेदन में अमिताभ ठाकुर ने कहा कि प्रस्तावित कार्रवाई का असर केवल भवनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की शिक्षा, आजीविका और अन्य वैध अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने आयोग से अनुरोध किया कि किसी भी निर्णय से पहले इन पक्षों के हितों और अधिकारों का समुचित ध्यान रखा जाए.
हर भवन की अलग जांच और नियमितीकरण पर विचार की अपील
अमिताभ ठाकुर ने मांग की कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक भवन का अलग-अलग परीक्षण कराया जाए और जहां संभव हो, नियमितीकरण जैसे वैधानिक विकल्पों पर भी विचार किया जाए. इसके साथ ही उन्होंने पूरे प्रदेश में समान प्रवर्तन मानदंड अपनाने तथा इस मामले से जुड़े अधिकारियों की संभावित प्रशासनिक जवाबदेही की निष्पक्ष जांच कराने की भी आवश्यकता बताई.
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उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से अपील की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर यह सुनिश्चित करे कि आगे की कार्रवाई कानून, संविधान और मानवाधिकारों के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप तथा संतुलित तरीके से की जाए.


