सतीश सिंह, लखनऊ. सोमवार को राजधानी में समाजवादी पार्टी के यूथ ब्रिगेड कार्यकर्ताओं ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर हो रही कार्रवाई और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ सांकेतिक रूप से किताबों पर खिलौना बुल्डोजर रखकर उसे लोहे की जंजीरों से बांधा और विधानसभा की ओर कूच किया.
प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर-पोस्टर थे, जिनके जरिए उन्होंने शिक्षा संस्थानों पर कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया. जैसे ही सपा कार्यकर्ता विधानसभा के नजदीक पहुंचे, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया. इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई. विरोध जताते हुए कई कार्यकर्ता सड़क पर ही लेट गए.
इसे भी पढ़ें : जौहर यूनिवर्सिटी मामले ने लिया नया मोड़! अमिताभ ठाकुर ने मानवाधिकार आयोग से की तत्काल दखल की मांग
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने करीब 10 से 12 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस बस में बैठाया और उन्हें इको गार्डन धरना स्थल भेज दिया. पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते कुछ ही मिनटों में प्रदर्शन स्थल को खाली करा लिया गया. प्रदर्शन में शामिल सपा नेता उदय सिंह ने आरोप लगाया कि जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की राजनीति विशेष वर्ग और शिक्षण संस्थानों के विरोध पर आधारित है. उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई सरकारी और राजनीतिक भवनों के निर्माण संबंधी मामलों की भी जांच होनी चाहिए.
वहीं, प्रदर्शनकारी मनीष कुमार ने कहा कि वर्तमान सरकार शिक्षा विरोधी मानसिकता के साथ काम कर रही है और प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बचाने और जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए सड़कों पर उतरना उनकी मजबूरी बन गया है. हालांकि, जौहर यूनिवर्सिटी पर की जा रही कार्रवाई और अन्य आरोपों को लेकर सरकार की ओर से अलग पक्ष भी सामने आता रहा है. ऐसे में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है.


