प्रतीक पटनायक, धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की पारंपरिक कृषि विरासत को बड़ी पहचान मिली है। नगरी विकासखंड के ग्राम गुहनानाला में पीढ़ियों से संरक्षित की जा रही स्थानीय ‘चिरपोटी टमाटर’ किस्म का पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण यानी PPV&FRA के अंतर्गत पंजीयन हुआ है। इस उपलब्धि के लिए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने संरक्षक किसान बंशीलाल सोढ़ी को सम्मानित किया। खास बात ये है कि किसान बंशीलाल सोढ़ी अपने पिता से मिली इस पारंपरिक बीज संरक्षण की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

धमतरी के नगरी विकासखंड के ग्राम गुहनानाला से सामने आई ये कहानी सिर्फ एक टमाटर की किस्म की नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे किसान के पारंपरिक ज्ञान और बीज संरक्षण की है। किसान बंशीलाल सोढ़ी के परिवार में ‘चिरपोटी टमाटर’ का संरक्षण उनके स्वर्गीय पिता मंगलू राम सोढ़ी के समय से किया जा रहा है। पिता के निधन के बाद बंशीलाल ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और स्थानीय किस्म के बीज का संरक्षण एवं उत्पादन जारी रखा। अब इसी पारंपरिक किस्म को PPV&FRA के तहत आधिकारिक कानूनी पहचान मिली है।

‘चिरपोटी टमाटर’ के दस्तावेजीकरण और पंजीयन की प्रक्रिया में कृषि विज्ञान केंद्र धमतरी ने तकनीकी सहयोग दिया। PPV&FRA प्रभारी प्रेमलाल साहू के माध्यम से पंजीयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पंजीयन के बाद वर्षों से किसान परिवार द्वारा संरक्षित इस स्थानीय किस्म को औपचारिक पहचान के साथ कृषक अधिकारों के संरक्षण का आधार भी मिला है।

PPV&FRA के तहत पंजीयन किसानों द्वारा संरक्षित स्थानीय और पारंपरिक फसल किस्मों को मान्यता देने के साथ कृषि जैव-विविधता और पारंपरिक बीजों के संरक्षण को बढ़ावा देता है। कृषि विज्ञान केंद्र ने जिले के किसानों से भी अपील की है कि उनके पास लंबे समय से संरक्षित कोई विशिष्ट स्थानीय या पारंपरिक फसल किस्म अथवा बीज है तो इसकी जानकारी केंद्र तक पहुंचाएं, ताकि उसके दस्तावेजीकरण और पंजीयन की संभावनाओं पर मार्गदर्शन दिया जा सके।

‘चिरपोटी टमाटर’ का पंजीयन धमतरी की कृषि विरासत और स्थानीय जैव-विविधता को संरक्षित करने की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है। खेत में पीढ़ियों से सुरक्षित रखा गया एक बीज अब न सिर्फ किसान परिवार की विरासत है, बल्कि उसे कानूनी पहचान भी मिल गई है।

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