दिनभर की ड्यूटी, अचानक बढ़ जाने वाली शिफ्ट और देर रात तक थाने में रहने के बाद घर लौटने के लिए लंबा सफर तय करना महिला पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ड्यूटी के साथ परिवार की जिम्मेदारियां संभालने वाली महिला पुलिसकर्मियों की इस परेशानी को कम करने के लिए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) अब उनके रहने की व्यवस्था ड्यूटी स्थल के आसपास करने की तैयारी में है। योजना के तहत आने वाले वर्षों में दिल्ली के हर जिले में महिला पुलिसकर्मियों के लिए आवासीय परिसर विकसित किए जाएंगे। इन परिसरों को थानों और अन्य प्रमुख ड्यूटी स्थलों के आसपास बनाए जाने की योजना है, ताकि महिला पुलिसकर्मियों को देर रात ड्यूटी खत्म होने के बाद लंबा सफर न करना पड़े।
ड्यूटी स्थल के करीब मिलेगा घर
दिल्ली पुलिस की इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिला पुलिसकर्मियों को उनके कार्यस्थल के नजदीक आवास उपलब्ध कराना है। पुलिस की नौकरी में कई बार ड्यूटी का समय तय नहीं होता और कानून-व्यवस्था की स्थिति या किसी विशेष अभियान के दौरान शिफ्ट अचानक बढ़ सकती है। ऐसे में थाने से दूर रहने वाली महिला पुलिसकर्मियों को घर पहुंचने में अतिरिक्त समय और परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पहले चरण में पांच जगह बनेंगे स्टाफ क्वार्टर, 145 करोड़ रुपये होंगे खर्च
महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी स्थल के करीब आवास उपलब्ध कराने की योजना के तहत पहले चरण में पांच स्थानों पर स्टाफ क्वार्टरों का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं पर करीब 145 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सभी परियोजनाओं को ईपीसी मोड-1 यानी डिजाइन एंड बिल्ड आधार पर तैयार किया जाएगा। योजना के तहत फतेहपुर बेरी में पुलिस थाना परिसर के साथ महिला पुलिसकर्मियों के लिए आवासीय सुविधा विकसित की जाएगी। इससे यहां तैनात महिला स्टाफ को ड्यूटी स्थल के आसपास रहने की सुविधा मिल सकेगी।
गोविंदपुरी और अमन विहार में भी बनेंगे क्वार्टर
गोविंदपुरी और अमन विहार में पुलिस थाने के साथ महिला पुलिसकर्मियों के लिए स्टाफ क्वार्टर और चारदीवारी का निर्माण प्रस्तावित है। इन परिसरों में महिला स्टाफ के लिए रहने की सुविधा विकसित की जाएगी, जिससे उन्हें ड्यूटी के बाद लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी। कापसहेड़ा में पुलिस थाना और 12 स्टाफ क्वार्टर बनाए जाएंगे। इनमें चार टाइप-3 और आठ टाइप-2 क्वार्टर प्रस्तावित हैं। वहीं, पालम विहार में भी 12 स्टाफ क्वार्टर बनाए जाने की योजना है। इनमें छह टाइप-3 और छह टाइप-2 क्वार्टर होंगे। कापसहेड़ा और पालम विहार में बनाए जाने वाले स्टाफ क्वार्टर सभी स्टाफ के लिए उपलब्ध होंगे। पहले चरण की इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ड्यूटी स्थल के आसपास पुलिसकर्मियों के लिए आवासीय सुविधा का दायरा आगे और बढ़ाया जा सकता है।
नई भर्ती महिला पुलिसकर्मियों के लिए बनेगा विशेष हॉस्टल
दिल्ली पुलिस की आवासीय योजना में विशेष महिला हॉस्टल बनाने का भी प्रावधान किया गया है। यह हॉस्टल खासतौर पर नई भर्ती होने वाली महिला पुलिसकर्मियों के लिए होगा। दूसरे जिलों या दूरदराज के इलाकों से दिल्ली पुलिस में नौकरी के लिए आने वाली महिला कर्मचारियों को नौकरी की शुरुआत में ही सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे नई भर्ती महिला पुलिसकर्मियों को दिल्ली में रहने के लिए तुरंत अलग से आवास तलाशने की परेशानी नहीं होगी। शुरुआती अवधि में हॉस्टल की सुविधा मिलने से वे आसानी से अपनी ड्यूटी पर ध्यान दे सकेंगी।
रात की ड्यूटी के बाद लंबा सफर होगा कम
पुलिस विभाग में महिला और पुरुष कर्मचारियों को जरूरत के मुताबिक अलग-अलग समय पर ड्यूटी करनी पड़ती है। कई बार महिला पुलिसकर्मियों की ड्यूटी देर रात तक चलती है। ऐसे में ड्यूटी खत्म होने के बाद दूर स्थित घर तक पहुंचने में लगने वाला समय और सुरक्षा को लेकर चिंता उनकी परेशानी बढ़ा सकती है। थाने या ड्यूटी स्थल के पास आवास उपलब्ध होने से रात की ड्यूटी के बाद लंबा सफर करने की जरूरत कम होगी। इससे महिला पुलिसकर्मियों को राहत मिलने के साथ उनके आने-जाने में लगने वाला समय भी बचेगा।
आपात स्थिति में जल्दी पहुंचना होगा आसान
ड्यूटी स्थल के नजदीक रहने का एक और फायदा यह होगा कि आपात स्थिति में महिला पुलिसकर्मियों को कम समय में ड्यूटी पर बुलाया जा सकेगा। कानून-व्यवस्था से जुड़ी अचानक पैदा होने वाली स्थिति या अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत पड़ने पर नजदीक रहने वाले कर्मचारियों की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
तीन साल में पूरी होंगी सभी परियोजनाएं, CPWD ने जारी किए टेंडर
दिल्ली पुलिस की आवासीय योजना के तहत प्रस्तावित सभी परियोजनाओं को अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) की ओर से टेंडर जारी किए जा चुके हैं। परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए निर्माण प्रक्रिया को तेज रखने की तैयारी है। परियोजनाओं के लिए एक ही कंपनी को डिजाइन, निर्माण और अन्य संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय में लगने वाला समय कम होगा और डिजाइन से लेकर निर्माण तक की प्रक्रिया एक ही एजेंसी के तहत आगे बढ़ सकेगी। दिल्ली पुलिस को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से निर्माण कार्य में तेजी आएगी और प्रस्तावित आवासीय परिसरों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जा सकेगा।
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