भारत ने डेंगू के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ (QDENGA/TAK-003) को मंजूरी दे दी है। जापानी दवा कंपनी टाकेडा (Takeda) द्वारा विकसित यह वैक्सीन डेंगू वायरस के चारों प्रमुख सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) से सुरक्षा देने के लिए तैयार की गई है। भारत में डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है क्यूडेंगा और कैसे करती है काम?

क्यूडेंगा एक लाइव-अटेनुएटेड टेट्रावैलेंट वैक्सीन है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांचने के लिए ब्लड टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ है या नहीं। यही इसे पहले उपलब्ध डेंगू वैक्सीन विकल्पों से अलग बनाता है।

40 से अधिक देशों में पहले से इस्तेमाल

इस वैक्सीन को यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK), ब्राजील, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना समेत 40 से अधिक देशों में पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। अब भारत भी इस सूची में शामिल हो गया है, जिससे डेंगू के गंभीर मामलों और मौतों में कमी आने की उम्मीद बढ़ी है।

क्लिनिकल ट्रायल में मिले प्रभावशाली नतीजे

‘TIDES फेज-III’ क्लिनिकल ट्रायल में 8 डेंगू-प्रभावित देशों के 20,000 से अधिक बच्चों और किशोरों को शामिल किया गया। लगभग साढ़े चार साल तक चले अध्ययन में वैक्सीन ने डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को 84% तक घटाया, जबकि पुष्ट डेंगू संक्रमण से 61% तक सुरक्षा प्रदान की। यह उन लोगों में भी प्रभावी पाई गई जिन्हें पहले कभी डेंगू नहीं हुआ था।

भारत के लिए क्यों है अहम?

वैश्विक डेंगू मामलों का बड़ा हिस्सा भारत में दर्ज होता है और पिछले दो दशकों में संक्रमण के मामलों में 11 गुना से अधिक वृद्धि हुई है। ऐसे में वैक्सीन मच्छर नियंत्रण, साफ-सफाई, व्यक्तिगत बचाव और समय पर उपचार जैसी मौजूदा रणनीतियों को मजबूत करेगी।

डोज, निर्माण और कीमत

क्यूडेंगा की दो खुराकें दी जाती हैं, जिनके बीच तीन महीने का अंतर रखा जाता है। टाकेडा ने हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल ई के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत भारत में हर साल लगभग 5 करोड़ डोज तैयार की जाएंगी। हालांकि, इसकी आधिकारिक कीमत अभी घोषित नहीं की गई है।

क्या डेंगू पूरी तरह खत्म हो जाएगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल वैक्सीन से डेंगू का पूरी तरह उन्मूलन संभव नहीं है। मच्छर नियंत्रण, जलभराव रोकना, स्वच्छता और व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों के साथ टीकाकरण को अपनाने पर ही डेंगू के प्रभाव को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।

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