भुवनेश्वर: ओडिशा की राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहा है. राज्यसभा चुनाव के दौरान जिस तरह बीजू जनता दल (बीजेडी) और कांग्रेस के बीच ‘मधुचंद्र’ (दोस्ती) के संकेत मिले थे, उस पर अब पूरी तरह से विराम लगता दिख रहा है. विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के बदले हुए तेवरों ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है. नवीन पटनायक ने एक तीर से दो शिकार करते हुए बीजेपी पर हमला बोलने के बहाने कांग्रेस को अपने निशाने पर लिया है.

अभी दो महीने पहले ही राज्यसभा चुनाव के दौरान बीजेडी और कांग्रेस के विधायक सदन में एक साथ खड़े नजर आ रहे थे. दोनों दलों का मकसद सत्तारूढ़ बीजेपी को घेरना था. लेकिन विधानसभा के ताजा सत्र में यह एकजुटता पूरी तरह गायब दिखी. नवीन पटनायक ने अपनी पुरानी ‘समान दूरी’ (Equidistance) वाली रणनीति पर लौटते हुए कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

नवीन पटनायक ने सदन में बीजेपी को घेरते वक्त एक पुरानी दुखती रग छेड़ दी. उन्होंने कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुए बलात्कार और हत्या के मामलों का जिक्र करते हुए कांग्रेस को जमकर खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कांग्रेस के दौर को महिला सुरक्षा के लिहाज से काला समय बताया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी पर हमला करने के बहाने कांग्रेस की खामियां गिनाना नवीन पटनायक की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.

नवीन पटनायक के इस हृदय परिवर्तन के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए. बीजेडी और कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं. दोनों के शीर्ष नेतृत्व की नजदीकी से निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं में भ्रम और नाराजगी फैल रही थी. नवीन जानते हैं कि यदि वे कांग्रेस के ज्यादा करीब दिखते हैं, तो बीजेपी को ‘राज्य में असली विपक्ष’ होने का दावा करने का मौका मिल जाएगा. यह साफ हो गया है कि राज्यसभा चुनाव में दोनों का साथ आना एक रणनीतिक मजबूरी थी, न कि कोई वैचारिक गठबंधन.

बीजेडी के इस हमले के बाद कांग्रेस ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने साफ कर दिया है कि उनका बीजेडी के साथ कोई स्थायी गठबंधन नहीं है. कांग्रेस ने पटलवार करते हुए कहा कि बीजेडी के शासन में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और नवीन पटनायक अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए इतिहास का सहारा ले रहे हैं.

ओडिशा में बीजेडी और कांग्रेस के बीच चल रहा यह ‘लुका-छिपी’ का खेल अब समाप्त हो चुका है. नवीन पटनायक ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वे अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ आगे बढ़ेंगे. अब देखना यह होगा कि इस आपसी खींचतान का फायदा बीजेपी आने वाले दिनों में कैसे उठाती है.