पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद हुई चुनावी हिंसा को लेकर राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी काला कोट पहनकर कोर्ट में दलीलें देने पहुंची। वह कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल और जस्टिस पार्थसारथी सेन के सामने पेश हुईं। सुनवाई के दौरान ममता ने कोर्ट को बताया कि राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इसमें बुलडोजर एक्शन भी शामिल है। पुलिस FIR दर्ज करने की परमिशन नहीं दे रही है।
उन्होंने TMC कार्यकर्ताओं पर हमले, आगजनी और हत्याओं के आरोप लगाते हुए कोर्ट से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की। इधर, सुनवाई के बाद जब ममता कोर्ट रूम से बाहर निकलीं, तो गलियारों में मौजूद वकीलों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। ये सभी ममता को देखकर बुआ चोर-भतीजे चोर के नारे लगाने लगे।
याचिका में कहा गया – TMC कार्यकर्ता घर छोड़ने मजबूर
दरअसल, अदालत में चुनावी हिंसा को लेकर जनहित याचिका दायर हुई है। यह याचिका उत्तरपारा विधानसभा क्षेत्र से हारे हुए उम्मीदवार शीर्षान्य बंद्योपाध्याय ने दायर की थी। 12 मई को दायर की गई जनहित याचिका में पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाया गया है। साथ ही दावा किया गया है कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े होने के कारण कई लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट में भी दलीलें रख चुकी हैं ममता
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई की थी, जहां तब बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी ने भीं दलीलें रखीं थीं। कोर्ट रूम में ममता ने 13 मिनट तक अपनी बात रखी। बेंच के सामने हाथ जोड़कर खड़ी ममता ने कहा कि हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा।
सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं थीं। मुकदमों में आमतौर पर मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं।
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