अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से पशुपालन विभाग के एक बड़े अधिकारी की काली करतूतों का पर्दाफाश हुआ है। जिले में संचालित गौशालाओं की आड़ में किस तरह सरकारी खजाने को लूटा जा रहा है और कैसे भ्रष्टाचार के पैसों से अकूत संपत्तियां बनाई गई हैं, इसकी पोल खोलती एक चौंकाने वाली पड़ताल सामने आई है। गौरक्षक और समाजसेवियों ने मऊगंज में पदस्थ डिप्टी डायरेक्टर जे.एल. साकेत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि महज एक साल के भीतर डिप्टी डायरेक्टर ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम करोड़ों की संपत्तियां और फार्म हाउस खड़े कर लिए हैं।
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मऊगंज जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी गोवंश संरक्षण योजना कागजों का पेट भरने तक सिमट कर रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि जिले की अधिकांश गौशालाएं या तो आज भी अधूरी पड़ी हैं या वहां एक भी गोवंश मौजूद नहीं है। लेकिन कागजों का जादू देखिए—जहाँ प्रति यूनिट अधिकतम क्षमता सिर्फ सौ गोवंश की है, वहाँ चार सौ से एक हजार तक गोवंश दर्ज कर भारी-भरकम अनुदान राशि डकार ली जा रही है।
बेलाहा पंचायत का मामला इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहाँ निर्माणधीन और अधूरी पड़ी गौशाला, जहाँ न पानी है, न चारा और न शेड, उसे भी कागजों में संचालित बताकर करीब 59 लाख रुपये की बड़ी रकम निकाल ली गई! एक तरफ जिम्मेदार अधिकारी कागजी दावों की पीठ थपथपा रहे हैं, तो दूसरी तरफ बेसहारा गोवंश सड़कों पर भटक रहे हैं, जिनकी वजह से आए दिन दर्दनाक सड़क हादसे हो रहे हैं, लोगों की जानें जा रही हैं और किसानों की गाढ़ी मेहनत से तैयार फसलें बर्बाद हो रही हैं।

लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इन घोटालों का पैसा जा कहाँ रहा है? जब हमारी न्यूज 24 और लल्लूराम डाट काम की टीम ने इस पूरे मामले की गहरी पड़ताल की, तो जो खुलासे हुए उसने सबको हिलाकर रख दिया। आरोप है कि पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जे.एल. साकेत ने अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के काले खेल से अकूत संपत्ति अर्जित की है।
दस्तावेजों के मुताबिक
- अटरिया गाँव में खसरा नंबर 16, 29/2 और 50/3 को मिलाकर 15 एकड़ 44 डिसमिल जमीन पर एक आलीशान फार्म हाउस खड़ा किया गया है।
- रीवा के संजय नगर, करही वार्ड क्रमांक 6 (खसरा नंबर 31/1/16/11/2) में लगभग 37 लाख रुपये की आधिकारिक कीमत का दो मंजिला मकान बेटे पुनीत कुमार साकेत के नाम खरीदा गया है, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों में है।
- घूरेहटा में बेटिया रश्मि और पूनम साकेत के नाम (खसरा नंबर 3483/3/5/1) बेशकीमती जमीन खरीदी गई, जिसमें विभाग में पदस्थ गौसेवक सतानंद पाठक के बैंक खाते से चेक क्रमांक 318644 के जरिए 4 लाख और डिप्टी डायरेक्टर द्वारा नकद व चेक से लाखों का भुगतान किए जाने के प्रमाण मिले हैं।
- इसके अलावा ढेरा (खसरा नंबर 60/7) खुद जे एल साकेत और (खसरा नंबर 51/20/1/3) में पत्नी आशा साकेत के नाम बना-बनाया मकान और जमीन खरीदी गई है। हद तो तब हो गई जब बेटे के नाम रजिस्टर्ड गाड़ी (क्रमांकMP-66-C-87-77) को खुद विभाग में अटैच कर सरकारी पैसे से फायदा लिया जा रहा है।
रिश्वत के इस खेल के डिजिटल सबूत भी सामने आए हैं। 5 जून 2025 को गौशाला संचालक से यूटीआर नंबर 922904839585 के जरिए 35 हजार रुपये सीधे डिप्टी डायरेक्टर की बेटी रश्मि साकेत के खाते में ट्रांसफर किए गए। वहीं, रीवा में मकान खरीद के दौरान एक गौशाला संचालक से जुड़े चेक (चेक क्रमांक 101807, राशि 7 लाख रुपये) के लेन-देन के पुख्ता दस्तावेज भी हाथ लगे हैं।
जब इस पूरे भ्रष्टाचार और रिश्वत के खेल को लेकर संभाग के कमिश्नर शैलेंद्र सिंह से सवाल किया गया, तो वे कैमरे के सामने जवाब देने से बचते नजर आए। लेकिन अब मामला तूल पकड़ चुका है। समाजसेवी अखिलेश पांडे ने जिला कलेक्टर को औपचारिक शिकायत सौंप दी है और चेतावनी दी है कि यदि डिप्टी डायरेक्टर, उनकी पत्नी, बेटियों, बेटे और संदिग्ध मददगार सतानंद पाठक के बैंक खातों की निष्पक्ष जांच हो जाए, तो भ्रष्टाचार की सारी परतें उधड़ कर सामने आ जाएंगी। अब देखना यह है कि इन पुख्ता सबूतों और दस्तावेजों के सामने आने के बाद शासन-प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है, या फिर फाइलों में ही इस घोटाले को दबा दिया जाता है!

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