इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने को लेकर एक अहम टिप्पणी की. इस पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की प्रतिक्रिया सामने आई है. मौलाना ने इस टिप्पणी को जायज करार देते हुए कहा कि शरियत ए इस्लामिया में भी ये बात स्पष्ट है कि ऐसी जगह पर नमाज न पढ़ी जाए, जहां कोई विवाद या तनाव हो या फिर किसी को कोई आपत्ति हो. मौलाना ने कहा कि ऐसी जगहों पर नमाज पढ़ने से बचना चाहिए.

मौलाना ने आगे कहा कि सार्वजनिक जगह ऐसी जगह होती है, जहां पर ट्रैफिक और आम लोगों की आवाजाही होती रहती है. इससे नमाज पढ़ने वाला भी डिस्टर्ब होगा. मौलाना ने बातों ही बातों में कहा कि, सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने से लोगों की समस्याएं बढ़ती हैं और इस्लाम किसी को तकलीफ नहीं देना चाहता. इस्लाम सबके लिए रहम का नजरिया रखता है. इसलिए सार्वजनिक जगहों पर नमाज न पढ़ कर, अपनी दुकान, मकान या मस्जिदों में नमाज पढ़ें ताकि नमाज अहमियत बनी रहे.

इसे भी पढ़ें : सार्वजनिक भूमि पर सभी का समान अधिकार, एकतरफा उपयोग कानूनन स्वीकार्य नहीं- HC

बता दें कि सार्वजनिक जमीन पर नमाज पढ़ने से जुड़ी एक याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी. अदालत ने कहा कि ऐसी भूमि का उपयोग किसी एक पक्ष द्वारा धार्मिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता. सार्वजनिक भूमि पर सभी का समान अधिकार होता है. इसका एकतरफा उपयोग कानूनन स्वीकार्य नहीं है.

न्यायालय ने कहा कि सीमित निजी क्षेत्र से परे यह विस्तार संरक्षित क्षेत्र से बाहर आता है और विनियमन के अधीन है. परंपरा से इतर गतिविधियों पर राज्य को हस्तक्षेप का अधिकार है. किसी भी व्यक्ति या समूह की धार्मिक स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है. बल्कि यह अन्य व्यक्तियों के अधिकारों और स्वतंत्रता पर भी निर्भर करती है. यदि सार्वजनिक भूमि का गलत तरीके से अंतरण (बैनामा) कर भीड़ इकट्ठा कर नमाज पढ़ने की मांग की जाती है तो ऐसा बैनामा अवैध माना जाएगा.