रामपुर/लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 शिक्षण भवनों के ध्वस्तीकरण पर मुरादाबाद मंडलायुक्त कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक का स्वागत किया है. उन्होंने इस फैसले को उचित बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से बुलडोजर कार्रवाई के बजाय नियमों के तहत शिक्षण संस्थानों का नियमितीकरण करने की नीति अपनाने की सलाह दी.
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कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय की इमारतों को गिराने की कार्रवाई पर रोक लगना सही फैसला है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में शिक्षा संस्थानों और वहां पढ़ रहे विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
छात्रों के भविष्य की जताई चिंता
बसपा प्रमुख ने कहा कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई का असर छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए. उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षा संस्थानों से जुड़े मामलों का समाधान कानून के दायरे में रहकर किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो.
सरकार को दी नई नीति अपनाने की सलाह
मायावती ने कहा कि केवल जौहर यूनिवर्सिटी ही नहीं, बल्कि प्रदेश के ऐसे सभी शिक्षण संस्थान जो तकनीकी कारणों से नियमों का पूरी तरह पालन नहीं कर पाए हैं, उन्हें बुलडोजर कार्रवाई के बजाय नियमों के अनुरूप वैध और नियमित बनाने की नीति अपनाई जानी चाहिए.
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क्या है पूरा मामला?
रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने स्वीकृत नक्शा नहीं होने का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को अवैध बताते हुए 15 दिनों के भीतर ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया था. इसके खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मुरादाबाद मंडलायुक्त कोर्ट में अपील की. सुनवाई के बाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने अगली सुनवाई तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है.


