तनवीर खान, मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में मीजल्स (खसरा) का संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। सतना, मैहर, नागौद और मझगवां क्षेत्रों में लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच मैहर के अजमाइन गांव में 3 वर्षीय मासूम की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि बच्चे की गंभीर हालत की जानकारी स्वास्थ्य अमले को थी, ब्लड सैंपल भी लिया गया था लेकिन उसे अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया। बाद में उपचार के लिए ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। 

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जानकारी के अनुसार इसी गांव के पटेल मोहल्ला में अब तक छह बच्चे मीजल्स पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें शरीर में दाने, बुखार डायरिया और सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण मिले थे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सैंपलिंग कराई गई जिसमें 6 बच्चों में खसरे की पुष्टि हुई। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सुचित्रा अग्रवाल के अनुसार संक्रमण की शुरुआत पन्ना से आए 9 वर्षीय पीयूष पटेल से हुई। उसे 25 मई को बुखार आया था और 30 मई को बिरला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद उसके छोटे भाई प्रद्युम्न पटेल को संक्रमण हुआ। जब यह परिवार मैहर के अजमाइन गांव स्थित रिश्तेदारों के यहां पहुंचा तो संपर्क में आने से 3 वर्षीय उमंग पटेल और पांच वर्षीय चिराग पटेल भी संक्रमित हो गए। अब तक चिराग पटेल (5 वर्ष) उमंग पटेल (3 वर्ष), सखैरुन निशा (1 वर्ष), तमन्ना मोहम्मद (5 वर्ष), ऋषि पटेल (5 वर्ष) और कार्तिक पटेल (4 वर्ष) में मीजल्स की पुष्टि हुई है।

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परिजनों के अनुसार उमंग को 6 जून से शरीर में दाने, बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायत थी। सूचना मिलने पर सीएचओ ने ओआरएस उपलब्ध कराया। 9 जून को एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप गौतम ने क्षेत्र का भ्रमण किया और 10 जून को बच्चे का ब्लड सैंपल लिया गया। इसके बावजूद उसकी हालत बिगड़ती रही। 11 जून को तबीयत अधिक खराब होने पर पहले स्थानीय चिकित्सक को दिखाया गया। राहत नहीं मिलने पर परिजन उसे सिविल अस्पताल मैहर लेकर जा रहे थे लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। वहीं उसका बड़ा भाई चिराग पटेल समय पर अस्पताल पहुंच गया और उपचार मिलने के बाद स्वस्थ हो गया।

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सूत्रों के मुताबिक उमंग की मौत 11 जून को हुई थी, जबकि उसकी मीजल्स पॉजिटिव रिपोर्ट 15 जून को प्राप्त हुई। इस घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और उपचार व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला टीकाकरण अधिकारी ने भी माना कि आउटब्रेक रिस्पांस इम्यूनाइजेशन (ओआरआई) गतिविधियों के बावजूद क्षेत्र में नियमित फॉलोअप नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि संबंधित एएनएमए सीएचओ और आशा कार्यकर्ता द्वारा अपेक्षित स्तर पर निगरानी नहीं की गई।

संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला ने मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी को पत्र लिखकर अजमाइन गांव के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को 7 दिन के लिए बंद करने का आग्रह किया है।

उन्होंने कहा कि आउटब्रेक नियंत्रण की गतिविधियों के बावजूद नए मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों को अवकाश देने और क्षेत्र के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालय बंद रखने की जरूरत है। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति रोककर हितग्राहियों को टेक होम राशन घर-घर पहुंचाने का सुझाव भी दिया गया है।

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