कुंदन कुमार, पटना। पटना हाईकोर्ट के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। वरिष्ठ न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय ने आज शुक्रवार (5 जून) को पटना हाईकोर्ट की 48वीं मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने राजभवन में मीनाक्षी मदन राय को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ शपथ ग्रहण समारोह में कई न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं मीनाक्षी मदन राय

मीनाक्षी मदन राय बिहार की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश हैं। इससे पहले रेखा दोषी पटना हाईकोर्ट की एकमात्र महिला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं, लेकिन स्थायी मुख्य न्यायाधीश के पद पर पहुंचने वाली मीनाक्षी मदन राय पहली महिला बनीं। 1916 में स्थापित पटना हाईकोर्ट का 109 साल का इतिहास रहा है, और इतने लंबे समय बाद किसी महिला को शीर्ष पद की जिम्मेदारी मिली है। यह न केवल न्यायपालिका में लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि बेटियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

तीन दशक से ज्यादा का है न्यायिक करियर

मीनाक्षी मदन राय का न्यायिक करियर तीन दशक से ज्यादा का है। उन्होंने 1992 में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और पटना हाईकोर्ट में सिविल, आपराधिक और संवैधानिक मामलों में वकालत की। 2013 में उन्हें पटना हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 2016 में स्थायी न्यायाधीश बनीं। पिछले वर्षों में उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए, जिनमें महिलाओं के अधिकार, सामाजिक न्याय और कानून के शासन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। उनकी छवि एक संतुलित, सख्त और संवेदनशील न्यायाधीश की रही है।

त्वरित न्याय, लंबित मामलों का निपटारा करना लक्ष्य

शपथ के बाद अपने संबोधन में मीनाक्षी मदन राय ने कहा कि उनका लक्ष्य त्वरित न्याय, लंबित मामलों का निपटारा और आम लोगों की अदालत तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना होगा। पटना हाईकोर्ट में फिलहाल हजारों मामले लंबित हैं। ऐसे में उनसे उम्मीद है कि वे तकनीक और प्रशासनिक सुधारों के जरिए न्याय प्रक्रिया को तेज करेंगी।

बिहार के लिए यह गर्व का क्षण है। मीनाक्षी मदन राय की नियुक्ति यह दिखाती है कि मेहनत और ईमानदारी से महिलाएं किसी भी क्षेत्र में शीर्ष पद तक पहुंच सकती हैं। पटना हाईकोर्ट के इतिहास में उनका कार्यकाल निश्चित रूप से याद रखा जाएगा।

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