शब्बीर अहमद, भोपाल। पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने के मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला कानूनी पहलू सामने आया है। दरअसल, जिस कथित मामले को लेकर उनका पर्चा खारिज किया गया है, वह करीब साल भर पुराना है और उस पर अदालत का कोई अंतिम फैसला भी नहीं आया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से दिनभर कोई राहत न मिलने के बाद कांग्रेस ने आखिरकार देर रात 1:48 बजे सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका दायर की।
सितंबर 2025 का है मामला, कोर्ट का फैसला अब भी लंबित
मामले की तह में जाएं तो 17 सितंबर 2025 को तेलंगाना की नामपल्ली कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन को एक नोटिस जारी किया था। इस नोटिस का मीनाक्षी नटराजन की ओर से कानूनी रूप से जवाब भी दाखिल कर दिया गया था। नोटिस का जवाब दिए जाने के बाद से लेकर अब तक नामपल्ली कोर्ट ने इस मामले में कोई अंतिम निर्णय या फैसला नहीं सुनाया है। यानी यह मामला केवल एक नोटिस प्रक्रिया के स्तर पर लंबित है, न कि इसमें कोई दोषसिद्धि (Conviction) हुई है। इसके बावजूद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा इसे ‘अपराधिक प्रकरण’ मानकर नामांकन खारिज कर दिया गया।
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आधी रात को खटखटाया सर्वोच्च अदालत का दरवाजा
कांग्रेस ने इस अन्याय के खिलाफ निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। कल दिनभर कांग्रेस के दिग्गज नेता और कानूनी विंग चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार करते रहे कि वहां से नामांकन बहाली को लेकर कोई सकारात्मक आदेश आएगा। रात 1:48 बजे का एक्शन: जब देर रात तक चुनाव आयोग की तरफ से कोई निर्णय या राहत नहीं मिली, तो कांग्रेस ने बिना वक्त गंवाए रात को ही मोर्चा संभाला। पार्टी के वकीलों ने आधी रात को 1:48 बजे सुप्रीम कोर्ट में ऑनलाइन याचिका (Petition) दाखिल कर दी।
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सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी
कांग्रेस का तर्क है कि जब किसी अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को दोषी ही नहीं ठहराया और मामला सिर्फ एक नोटिस के जवाब तक सीमित है, तो उसे ‘क्रिमिनल केस छिपाने’ का आधार बनाकर किसी का लोकतांत्रिक अधिकार कैसे छीना जा सकता है? अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।


