मेरठ के दबथुवा गांव के किसानों ने चकबंदी प्रक्रिया के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है. ग्रामीणों ने चकबंदी लेखपाल पर रिश्वतखोरी और अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए प्रक्रिया रद्द करने की मांग की है.
मेरठ. दबथुवा गांव में चकबंदी प्रक्रिया के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले दर्जनों किसानों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया. ग्रामीणों ने चकबंदी विभाग पर कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को ज्ञापन सौंपा.
किसानों का आरोप है कि गांव के करीब 90 प्रतिशत किसान चकबंदी प्रक्रिया के पक्ष में नहीं हैं. इसके बावजूद चकबंदी लेखपाल और विभागीय अधिकारी कथित तौर पर इसे मनमाने तरीके से लागू कराने का प्रयास कर रहे हैं.
लेखपाल पर आरोप
ग्रामीणों ने चकबंदी लेखपाल पर रिश्वतखोरी, मृत लोगों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कराने और ग्रामीणों को धमकाने के आरोप लगाए हैं. किसानों का दावा है कि लेखपाल पर पहले से लाखों रुपये की रिश्वत लेने के आरोप हैं.
दबथुवा गांव मेरठ विकास प्राधिकरण की सीमा में आता है और मेरठ-करनाल हाईवे पर स्थित है. ग्रामीणों के अनुसार, 1970 के दशक में सेना के लिए गांव की करीब 5,000 से 5,500 बीघा जमीन अधिग्रहित की गई थी, जिसमें अब करीब 2,000 से 2,200 बीघा जमीन बची है.
चकबंदी रद्द करने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न तो रास्तों की कमी है और न ही पानी की समस्या है. उनका आरोप है कि चकबंदी किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने और भाइयों के बीच विवाद पैदा करने के उद्देश्य से कराई जा रही है.
धरना दे रहे किसानों ने कहा कि जब तक कथित भ्रष्ट लेखपाल को निलंबित नहीं किया जाता और चकबंदी निरस्त करने का आदेश जारी नहीं होता, तब तक वे कलेक्ट्रेट से नहीं हटेंगे. उन्होंने जरूरत पड़ने पर गांव की महिलाओं और बच्चों को भी कलेक्ट्रेट बुलाने की बात कही.
किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों ने अधिकारियों के सामने चकबंदी लेखपाल को तत्काल पद से हटाने और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग रखी. इसके साथ ही ग्राम दबथुवा में जारी चकबंदी प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने का आधिकारिक आदेश जिलाधिकारी द्वारा तत्काल पारित करने की मांग की गई है.



