Supreme Court Hearing On NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। पेपर लीक के बाद किए गए सुधारों की जानकारी मोदी सरकार (Modi government) ने सुप्रीम कोर्ट में दी। बुधवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि नीट परीक्षा कराने के लिए अभी जो सिस्टम है वह फुल प्रूफ यानी पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि सरकार ने यह भी माना कि इस प्रक्रिया में इंसानी दखल भी होता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर छात्रों तक पहुंचाने में गोपनीयता को लेकर कितनी सावधानी बरती जाती है। मोदी सरकार की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप यूपीएससी (UPSC) से सीखना चाहिए।

दरअसल नीट यूजी में गड़बड़ियां सामने आने के बाद शीर्ष अदालत आज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधारों की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि वर्तमान एनटीए को भंग किया जाए। याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को राधाकृष्णन पैनल, नंदन नीलेकणी कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

वहीं सुनवाई के दौरान सरकार के कदम की जानकारी देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि NEET के प्रश्न-पत्र ले जाने वाली गाड़ियों में GPS लगा है, छोटी-सी हरकत भी रिकॉर्ड होती है। कई मॉडरेटर से प्रश्न बैंक तैयार करने को कहा गया है, उन्हें नहीं पता कि कौन-से सवाल प्रश्न-पत्र का हिस्सा बनेंगे। इसपर जज ने कहा कि आप जो बता रहे हैं, उन सब बातों की राधाकृष्णन कमिटी समीक्षा कर चुकी है। कमिटी ने संस्थागत समस्याओं की बात कही थी. हम चाहते हैं कि दूरगामी समाधान हो। उन्होंने कहा कि आप यूपीएससी को देखिए. परीक्षा बिना समस्या के आयोजित हो रही है। NTA को भी ऐसा करना होगा. विशेषज्ञ अधिकारी नियुक्त कीजिए जो बदलती तकनीक को समझते हों।

नीट यूजी की सुरक्षा को लेकर सरकार ने क्या क्या कदम उठाए

प्रश्नपत्रों का निर्माण और चयन: मॉडरेटरों का एक समूह 100-100 प्रश्न चुनकर चार अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार करता है। उन्हें भी यह पता नहीं होता कि लास्ट में छात्रों को कौन सा प्रश्नपत्र मिलेगा। इन 4 सेटों में से NTA के महानिदेशक (DG) परीक्षा के लिए दो सेट चुनते हैं, जिससे आखिरी समय तक किसी को वास्तविक प्रश्नपत्र की जानकारी नहीं होती।

प्रश्नों का मिश्रण और सील: प्रश्नपत्रों को ऐसे बक्से में रखा जाता है जिस पर लगी सील की नकल नहीं की जा सकती। प्रश्न पूरी तरह से आपस में जंबल्ड (आगे-पीछे) होते हैं। 24-24 प्रश्नपत्रों के पैकेट्स को एक कार्डबोर्ड में रखा जाता है जिसमें एक वाटरमार्क नंबर, सिटी कोड, सेंटर कोड और पैकेट नंबर अंकित होता है, ताकि इसकी नकल करना आसान न हो।

प्रिंटिंग प्रेस की सुरक्षाः प्रश्नपत्र सीलबंद लिफाफे में सीसीटीवी कैमरों और सीआईएसएफ (CISF) की कड़ी निगरानी वाले दो अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेसों में भेजे जाते हैं। प्रिंटिंग प्रेस के चालू रहने के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं होती और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है।

जीपीएस ट्रैकिंग और बैंक स्ट्रांग रूमः प्रश्नपत्र लोहे के बक्से में बंद होते हैं जिसका ताला केवल एक बार उपयोग होने वाला होता है, जिसे केवल तोड़ा ही जा सकता है। इन्हें जिस गाड़ी से ले जाया जाता है उसमें जीपीएस लगा होता है और इसकी मामूली हलचल भी NTA मुख्यालय में रिकॉर्ड होती है।

डिजिटल लॉक और सुरक्षा कोडः प्रश्नपत्र ले जाने वाले व्यक्ति के पास एक डिजिटल लॉक वाला बॉक्स होता है, जिसकी चाबी का कोड उसे पता नहीं होता। प्रिंटिंग प्रेस पहुँचने पर वह व्यक्तिगत रूप से महानिदेशक (DG) को सूचित करता है, जिसके बाद ही DG द्वारा ताला खोलने का कोड दिया जाता है।

पीएम मोदी ने मेलोनी को Melody Toffee गिफ्ट दी, खुशी से झूम उठी इटली की प्रधानमंत्री

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m