कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान हुए प्रदर्शन में पुलिस ने जमकर लाठी-डंडे बरसाए. इस दौरान कई छात्रों को चोटें आईं. कई के सिर भी फुट गए. हालांकि, इस दौरान कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे. प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि, इतनी सख्ती के बावजूद सरकार का कोई आदमी एक बयान देने को सामने नहीं आया है. वहीं अब इस मुद्दे पर मोदी सरकार बैकफुट पर दिखाई दे रही है. क्योंकि, अबतक इस मुद्दे पर पीएम मोदी का पहली बार बयान सामने आया है. उन्होंने नीट पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है.

वहीँ दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा मंगलवार (21 जुलाई) को घायल छात्रों से मिलने दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल पहुंचे. उन्होंने डॉक्टरों की उस टीम से भी बातचीत की, जो कि घायल छात्रों का इलाज कर रही है. नड्डा ने इससे पहले सोमवार को सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका से मुलाकात की थी और उनकी मांगों को सुना था. बीजेपी के बड़े नेताओं के अलावा लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी भी घायल छात्रों से मिलने अस्पताल पहुंचे थे.

सोमवार को संसद मार्च के दौरान पुलिस ने किया था बल प्रयोग

युवाओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की ओर सोमवार मार्च किया था. इस दौरान पुलिस ने भीड़ को कंट्रोल करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े थे, तभी कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे. वहीं कई पुलिसकर्मियों को भी चोट लगी थी. प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर तोड़फोड़ भी की. दिल्ली के कॉनटप्लेस से लेकर जनपथ तक सड़कों पर पत्थर बिखरे दिखे.

कांग्रेस ने लाठीचार्ज के मुद्दे पर सरकार को घेरा

कांग्रेस ने केंद्र पर तंज कसा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर करके कहा, ‘हम चाहते थे कि इस मुद्दे पर चर्चा हो, जिसके बाद गृह मंत्री एक स्टेटमेंट दें, लेकिन सरकार ने हमारा ही मुंह बंद करा दिया. आखिर प्रदर्शन कर रहे बच्चों पर लाठीचार्ज क्यों किया गया, उन्हें क्यों मारा-पीटा गया? अगर इन मुद्दों पर संसद में भी चर्चा न हो, तो कहां बात करें? ये सरकार खुद अराजकता पैदा कर रही है, लोगों को उकसा रही है, ताकि उन पर लाठीचार्ज करवाया जाए, उन्हें मार-पीटकर, डराकर जेल में डाला जाए.’

छात्र आंदोलन से घबराई मोदी सरकार !

कहा जा रहा है कि, नड्डा का घायल छात्रों से मिलना और पीएम मोदी का मामले में प्रतिक्रिया सामने आना एक बड़ा इशारा हो सकता है. जानकारों का कहना है कि, सरकार पहली बार थोड़ी घबराई हुई दिखाई दे रही है. इसकी वजह साफ है, भारत के पड़ोसी देशों चाहे वो बांग्लादेश हो या नेपाल वहां भी छात्र आंदोलन की वजह से ही सत्ता पर बैठे लोगो को उखाड़ कर फेंक दिया गया था.

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