पानीपत। हरियाणा में मानसून की देरी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जून का महीना समाप्ति की ओर है, लेकिन पानीपत सहित प्रदेश के कई जिलों में अब तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के कारण खेतों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं, जिससे खरीफ फसलों पर संकट गहराता जा रहा है।
धान की रोपाई इस बार किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। किसानों का कहना है कि एक ओर लंबे बिजली कटौती के कारण सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, वहीं दूसरी ओर बारिश की कमी ने खेती को और मुश्किल बना दिया है।
किसानों के अनुसार गन्ना, बाजरा, कपास और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई पर मानसून की देरी का सीधा असर पड़ा है। कई किसानों ने खेतों में बुवाई तो कर दी है, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण बीज अंकुरित नहीं हो पा रहे हैं। वहीं, जहां फसल उग चुकी है, वहां पानी की कमी से फसलें मुरझाने लगी हैं।
भीषण गर्मी और लू के चलते किसान महंगे डीजल और बिजली के सहारे ट्यूबवेल से सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। इसका सबसे अधिक असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है, जिनके सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है।
किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ सीजन की फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे किसानों की आय प्रभावित होने के साथ-साथ कृषि उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
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