सोहराब आलम, मोतिहारी। पूर्वी चंपारण के लिए आज का दिन वाकई एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। राज्य सरकार की पहल और मजबूत इच्छाशक्ति के कारण मोतिहारी जिले में 350 करोड़ रुपये के बड़े पूंजी निवेश की आधिकारिक स्वीकृति मिल गई है। इस ऐतिहासिक फैसले से न केवल जिले में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के ढेरों अवसर भी पैदा होंगे। कोटवा प्रखंड में स्थित मदर डेयरी संयंत्र के माध्यम से विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों का निर्माण और विस्तार किया जाएगा, जिससे यह पूरा इलाका आर्थिक रूप से और अधिक समृद्ध होगा।
मत्स्य, पशु एवं वानकी मेले में हुई आधिकारिक घोषणा
इस बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक निवेश की घोषणा हाल ही में आयोजित मत्स्य, पशु एवं वानकी मेले के दौरान राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के प्रबंध निदेशक मिनेश शाह द्वारा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस भारी-भरकम निवेश से पूर्वी चंपारण के किसानों की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल जाएंगी। यहां का किसान अब पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा और पशुपालक किसानों की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा, जिससे क्षेत्र के युवाओं को पलायन करने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी।
सांसद राधा मोहन सिंह ने की सरकार की पहल की सराहना
स्थानीय सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार सरकार के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि आज मदर डेयरी ने पूर्वी चंपारण में 350 करोड़ रुपये के बड़े निवेश पर अपनी मुहर लगा दी है। उन्होंने बताया कि अब कोटवा स्थित मदर डेयरी प्लांट में दूध के अलावा अन्य कई तरह के उत्पादों का भी बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही, क्षेत्र में पशुओं के नस्ल सुधार और बेहतर पशु प्रजनन को लेकर भी एक व्यापक योजना पर काम किया जा रहा है, जिससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन की क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी।
किसानों और पशुपालकों के लिए चमकेगी किस्मत
पूर्वी चंपारण कृषि और पशुपालन प्रधान क्षेत्र रहा है, लेकिन बड़े उद्योगों के अभाव में यहां के किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था। मदर डेयरी द्वारा किए जा रहे इस 350 करोड़ रुपये के निवेश से स्थानीय किसानों का सीधा जुड़ाव एक राष्ट्रीय ब्रांड से हो जाएगा। दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों को उनके उत्पादों का उचित और समय पर मूल्य मिलेगा। पशुपालन से जुड़े लोगों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इससे उनकी आमदनी में सीधे तौर पर भारी इजाफा होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।



