सोहराब आलम, मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में प्रशासनिक सुस्ती और सरकारी कार्यों में लगातार बरती जा रही लापरवाही के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जिले में हाल ही में संपन्न हुई सीडब्ल्यूसी (CWC) और एमजीसी (MGC) से जुड़े महत्वपूर्ण विकास कार्यों व योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान यह बड़ी कार्रवाई सामने आई है। निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में रुचि न दिखाने और काम में भारी कोताही बरतने के कारण जिले के कुल 26 अंचलों के अंचलाधिकारियों (CO) और राजस्व अधिकारियों का वेतन अगले आदेश तक के लिए पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया है। जिला प्रशासन के इस अचानक और सख्त कदम से पूरे राजस्व विभाग और अंचल कार्यालयों के महकमे में हड़कंप मच गया है।
कार्रवाई के दायरे में आए 26 अंचल, सिर्फ एक प्रखंड बचा सुरक्षित
पूर्वी चंपारण जिला प्रशासनिक दृष्टि से काफी बड़ा क्षेत्र है, जहां कुल 27 प्रखंड और इतने ही अंचल हैं। प्रशासनिक आंकड़ों और समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, इस बड़ी कार्रवाई की जद में जिले के 26 अंचल आ चुके हैं। राहत की बात सिर्फ बंजरिया प्रखंड के लिए है, जिसे छोड़कर बाकी सभी 26 अंचलों के CO और राजस्व पदाधिकारियों पर यह गाज गिरी है। इन सभी अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं और महत्वपूर्ण कार्यों को गति देने में अपेक्षित प्रशासनिक रुचि नहीं दिखाई, जिसके कारण प्रशासनिक विवशता में यह वेतन रोकने का कड़ा निर्णय लेना पड़ा।


समीक्षा बैठक में खुली पोल, प्रगति रिपोर्ट रही बेहद असंतोषजनक
जिला मुख्यालय मोतिहारी में आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जब सीडब्ल्यूसी और एमजीसी से संबंधित प्रगति रिपोर्ट पटल पर रखी गई, तो स्थिति बेहद निराशाजनक पाई गई। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने पाया कि कई अंचलों में जमीनी स्तर पर कार्यों की गति शून्य के करीब है और फाइलों का निष्पादन लंबित रखा जा रहा है। बार-बार चेतावनी और निर्देश दिए जाने के बावजूद अधिकारियों की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं देखा गया। जिला प्रशासन ने इसे अनुशासनहीनता और प्रशासनिक दायित्वों के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल प्रभाव से यह दंडात्मक कार्रवाई की है।
प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करने की कवायद
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के कड़े कदम उठाने से मैदानी स्तर के अधिकारियों में कड़ा संदेश जाएगा। सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाएं समय पर धरातल पर उतर सकें, इसके लिए जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी हो गया था। वेतन स्थगित होने के बाद अब इन सभी 26 अंचलों के अधिकारियों पर अपने पेंडिंग कार्यों को तेजी से निपटाने और प्रदर्शन में सुधार करने का भारी दबाव बन गया है। प्रशासन की इस सख्ती से यह भी साफ हो गया है कि जनता के कार्यों में हीला-हवाली करने वाले अधिकारियों को अब बख्शा नहीं जाएगा और आने वाले दिनों में निगरानी और अधिक सख्त की जाएगी।



