न्यामुद्दीन अली, अनूपपुर। अनूपपुर से सटे छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के जनकपुर के पास स्थित ग्राम पंचायत उचेहरा का राजामाड़ा (रामवन) क्षेत्र इन दिनों अपनी अनूठी पहचान के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। धार्मिक आस्था और प्रकृति के अद्भुत संगम के रूप में प्रसिद्ध इस स्थल पर प्रतिदिन सुबह और शाम आरती के समय दर्जनों जंगली भालू प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह सिलसिला वर्ष 2013 से लगातार जारी है। जैसे ही मंदिर में आरती प्रारंभ होती है और घंटियों की ध्वनि गूंजती है, जंगल से भालू निकलकर कुटी परिसर तक पहुंच जाते हैं। प्रसाद ग्रहण करने के बाद वे बिना किसी उपद्रव के पुनः जंगल की ओर लौट जाते हैं। स्थल का अवलोकन करने पहुंची टीम ने भी इस अद्भुत दृश्य को प्रत्यक्ष रूप से देखा। आरती के दौरान बाबा की आवाज और घंटियों की ध्वनि सुनकर एक दर्जन से अधिक भालू कुटी परिसर में पहुंचे और बाबा के हाथों से प्रसाद ग्रहण करने के बाद शांतिपूर्वक वापस जंगल की ओर चले गए।

12 साल से आ रहे भालू

इस संबंध में कुटी में निवासरत सीताराम बाबा ने बताया कि वर्ष 2013 से पहले वे माहोरा पहाड़ क्षेत्र में रहते थे। बाद में जब वे राजामाड़ा (रामवन) पहुंचे, तब उनके आगमन के कुछ माह बाद ही भालुओं का यहां आना शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह क्रम नियमित हो गया और आज भी प्रतिदिन सुबह-शाम आरती के समय भालू प्रसाद लेने पहुंचते हैं। स्थानीय ग्रामीण इस घटना को बाबा की दिव्य कृपा और चमत्कार मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे भालुओं के व्यवहार और वर्षों से विकसित हुई एक स्वाभाविक आदत के रूप में देखते हैं।

पुजारी बोले- भालू नहीं, इंसानों से डर लगता है

कारण चाहे जो भी हो, लेकिन जंगल के जंगली भालुओं का धार्मिक स्थल पर पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करना निश्चित रूप से लोगों के लिए कौतूहल, आस्था और आकर्षण का विषय बना हुआ है। इस अद्भुत नजारे को देखने लोग दूर दराज से पहुंचते है और इसे भगवान की माया मानते है। वहीं पुजारी का कहना है कि ये भालू नहीं है ये जामवंत है और इन्हें अगर आप प्यार दोगे तो ये भी आप को प्यार देंगे और जब इनसे पूछा गया कि भालू से आप को डर नहीं लगता तो इनका कहना है मुझे भालू से नहीं इंसानों से डर लगता है।

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