संजय पाटीदार भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी ने प्रदेश सरकार से लेकर अन्नदाता किसानों की नींद उड़ा दी है। राज्य में 1 जून से 10 अगस्त के बीच औसतन 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है, जिससे मध्य प्रदेश के आधे से अधिक जिलों पर जल संकट और सूखे का खतरा मंडराने लगा है। इस बिगड़ते मौसम और जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में मंत्रियों और शासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ हाई-लेवल इमरजेंसी बैठक की। सीएम ने दोटूक लहजे में सख्त हिदायत दी है कि चाहे कम बारिश का संकट हो या अचानक अतिवृष्टि की स्थिति, आम जनता और किसानों को किसी भी हाल में तकलीफ नहीं होनी चाहिए।

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36 जलाशयों में पानी की भारी किल्लत: पिछले साल के मुकाबले 26% पिछड़ा जलस्तर

समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों ने प्रशासनिक अमले की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में अब तक 571 मिलीमीटर सामान्य बारिश की तुलना में महज 483 मिलीमीटर ही औसत बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 513.20 मिमी और पश्चिमी हिस्से में 459.80 मिमी बारिश ही रिकॉर्ड की गई है।

बारिश की कमी का सीधा असर प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों और बांधों पर पड़ा है। 10 अगस्त तक राज्य के प्रमुख जलाशयों में केवल 49 प्रतिशत ही पानी भर सका है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में बांध 75 प्रतिशत तक लबालब थे।

प्रदेश के 36 बड़े जलाशय ऐसे हैं जहां पानी का स्तर 50 प्रतिशत या उससे भी कम रह गया है, जो आने वाले समय में सिंचाई और पेयजल के बड़े संकट का इशारा कर रहा है।

कम पानी वाली फसलों पर जोर: चने की खेती के लिए बनेगा माहौल

खेती-किसानी के मोर्चे पर सीएम मोहन यादव ने कृषि विभाग को अलर्ट मोड पर रखा है:

चने की खेती को प्राथमिकता: यद्यपि प्रदेश में धान की 84 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है, लेकिन आगामी रबी सीजन को देखते हुए किसानों को कम पानी वाली फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषकर चने की फसल को प्राथमिकता देने और बीजों का पर्याप्त स्टॉक एडवांस में रखने को कहा गया है।

कालाबाजारी पर जीरो टॉलरेंस: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि खाद-बीज की आपूर्ति में कालाबाजारी या जमाखोरी की शिकायत पर तुरंत कड़ा एक्शन लिया जाएगा। मूंग खरीदी में सामने आईं गड़बड़ियों की जांच के लिए स्पेशल टीमें बनाकर सीधी कार्रवाई की जाएगी।

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आपदा प्रबंधन, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं पर कड़े निर्देश

24 घंटे एक्टिव रहेंगे कंट्रोल रूम: बाढ़ और जलभराव की मॉनिटरिंग के लिए राज्य व जिला स्तर पर आपदा नियंत्रण कक्ष लगातार चालू रहेंगे।

बांधों से चेतावनी अनिवार्य: निचले इलाकों में बिना पूर्व अलर्ट के किसी भी बांध से पानी नहीं छोड़ा जाएगा।

पारदर्शी फसल सर्वे: अतिवृष्टि या बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों का राजस्व विभाग की टीमें निष्पक्ष सर्वे करेंगी ताकि किसानों को तुरंत मुआवजा मिल सके। निर्बाध बिजली और दवाइयां: सिंचाई के लिए बिजली कटौती पर रोक रहेगी तथा मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए जिला अस्पतालों में पर्याप्त दवाओं का स्टॉक रखने को कहा गया है। बारिश थमते ही क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का काम शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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