इंदर कुमार, जबलपुर। मध्य प्रदेश में ग्रामीण कृषि विस्तर अधिकारी भर्ती परीक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पदों में भारी कटौती का मामला अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। हाई कोर्ट की जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार और कृषि विभाग को कड़ा रुख अपनाते हुए 4 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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444 से घटाकर 37 किए EWS पद
नर्मदापुरम निवासी अभ्यर्थी मोहित सिंह परमार द्वारा दायर की गई याचिका में कृषि विभाग के इस फैसले को सरासर भेदभावपूर्ण और आरक्षण नीति के नियमों के विपरीत बताया गया है। याचिका के अनुसार:
मूल विज्ञापन: कृषि विभाग ने 3 जुलाई 2026 को ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के कुल 2,784 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकाला था, जिसमें EWS वर्ग के लिए 444 पद आरक्षित रखे गए थे।
संशोधन का खेल: आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि के दौरान विभाग ने अचानक पदों की संख्या में संशोधन कर कुल पद घटाकर 2,377 कर दिए।
EWS सीटों पर कैंची: इस संशोधन के दौरान EWS श्रेणी के आरक्षित 444 पदों को नाटकीय रूप से घटाकर महज 37 कर दिया गया, जिससे सैकड़ों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है।
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4 सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई मामले में याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और कृषि विभाग से जवाब-तलब किया है। अदालत इस मामले पर 4 सप्ताह बाद अगली सुनवाई करेगी।
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