कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को झटका लगा है। कोर्ट ने कहा कि सेवा शर्तों पर PIL नहीं लगाई जा सकती है। वहीं HC ने सक्षम न्यायालय में याचिका दायर करने की छूट दी है। आइए जानते है आखिर पूरा मामला क्या है…

दरअसल, कार्यकर्ता संघ की ओर से याचिका दायर की गई थी। सीधी निवासी संगठन की नेता ने जनहित याचिका लगाई गई थी। जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित कर्मचारी के समान सेवा शर्तें और मानदेय देने की बात कही थी। प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सालों से सामान वेतन और सेवा शर्तों की मांग कर रही हैं।

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आपको बता दें कि वर्तमान में प्रदेश में 1 लाख 80 हजार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है। जिन्हें 15 हजार रुपए सैलरी मिल रही है। साल 2025 के बाद से भर्ती आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 13 हजार रुपये महीना मिलता है। आंगनवाड़ी सहायिका को 7500 रुपये महीना मिलता है। 2G, 3G मोबाइल दिया गया है, लेकिन रिचार्ज का पैसा रेगुलर नहीं मिलता है। स्मार्ट फोन से काम करना पड़ता है, वो कार्यकर्ताओं को खुद लाने कहा जाता है

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगें

लंबे समय से काम कर रही कार्यकर्ताओं को नियमित करने, रेगुलर न करने की स्थिति सरकारी कर्मचारी के समान वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी की भी मांग हो रही है। साथ ही कार्यकर्ताओं के 100 प्रतिशत प्रमोशन, केंद्र सरकार की ओर से बढ़ाए हुए मानदेय कटौती वापस लेने की मांग है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी ग्रेजुएटी का लाभ देने का आदेश दे चुका है।

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