शिखिल ब्यौहार, भोपाल/ कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के गृह क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ है। दरअसल, मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार ने बीजेपी का दामन थामा हैं। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई है। इधर ग्वालियर में सिंधिया समर्थक नेता और पूर्व पार्षद देवेंद्र पाठक ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष ने थामा भाजपा का दामन
बैतूल जिले की मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। आपको बता दें कि नीतू परमार का राजनीतिक सफर चर्चाओं में रहा है। साल 2022 में नगरीय निकाय चुनाव में नीतू परमार भाजपा के रूप में जीत मिली थी। जीत के बाद कांग्रेस के समर्थन से नगर पालिका अध्यक्ष बनी थी। इसके बाद नीतू के निर्वाचन को अदालत में चुनौती दी गई थी। जून 2023 में जिला अदालत ने उनका चुनाव निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट में 3 साल की संघर्ष के बाद दोबारा अध्यक्ष पद बहाल करने का आदेश 2026 में दिया गया।

पूर्व पार्षद ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा
ग्वालियर के वार्ड-25 से पार्षद रह चुके देवेंद्र पाठक ने अपना इस्तीफा सोशल मीडिया के जरिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, बीजेपी जिला अध्यक्ष जय प्रकाश राजौरिया और संगठन को भेजा है। देवेंद्र पाठक ने अपने इस्तीफे में पार्टी नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके क्षेत्र में पार्टी पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल के इशारे पर चल रही है। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व विधायक मुन्नालाल पर गम्भीर आरोप भी लगाए हैं। देवेंद्र पाठक का कहना है कि समर्पित कार्यकर्ताओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।
ग्वालियर बीजेपी की अंदरूनी राजनीति में हलचल तेज
उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि उनके साथ ब्राह्मण समाज और उनके समर्थक भी इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे ग्वालियर बीजेपी की अंदरूनी राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इस्तीफे के बावजूद देवेंद्र पाठक ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति अपनी निष्ठा कायम रखने की बात कही है। उन्होंने साफ कहा कि मैं जीवनभर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ रहूंगा। बहरहाल अब देखना होगा कि बीजेपी संगठन इस इस्तीफे को कितनी गंभीरता से लेता है और आने वाले दिनों में ग्वालियर की राजनीति में इसका क्या असर देखने को मिलता है।


