मुजफ्फरपुर। जिले में उत्पाद विभाग ने शराब तस्करों के एक बड़े और शातिर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। विभाग की टीम ने मुजफ्फरपुर-दरभंगा राष्ट्रीय राजमार्ग-57 पर मैठी टोल प्लाजा के पास एक कंटेनर को पकड़ा, जिसके अंदर जूतों की ढुलाई की आड़ में भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब छिपाई गई थी। पुलिस और उत्पाद विभाग की इस कार्रवाई से तस्करों के नापाक मंसूबों पर पानी फेर गया है। जब्त की गई शराब की कुल कीमत बाजार में 40 से 50 लाख रुपए के बीच आंकी जा रही है।
गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई और घेराबंदी
उत्पाद विभाग को पहले ही गुप्त सूचना मिली थी कि पंजाब से शराब की एक बड़ी खेप कंटेनर के जरिए मुजफ्फरपुर लाई जा रही है। यह खेप उत्तर प्रदेश, बलिया, सीवान और छपरा के रास्ते होते हुए मैठी टोल प्लाजा के पास पहुंची थी। इस इनपुट के आधार पर उत्पाद विभाग की टीम ने एएसआई रंजन कुमार सिंह और अजीत कुमार के नेतृत्व में जाल बिछाया। टीम को मैठी टोल प्लाजा से करीब 100 मीटर पहले संदिग्ध हालत में वह कंटेनर खड़ा मिला। अधिकारी काफी देर तक चालक की हरकतों और उसकी मोबाइल पर चल रही बातचीत पर नजर बनाए रखे। जब कोई अन्य संदिग्ध व्यक्ति वहां नहीं पहुंचा, तो टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कंटेनर को अपने कब्जे में ले लिया और चालक तथा उपचालक को हिरासत में ले लिया।
खाली कैरेट और गद्दों के नीचे छिपाकर रखी गई थी खेप
जब उत्पाद विभाग की टीम ने कंटेनर की तलाशी लेनी शुरू की, तो पकड़े गए आरोपितों ने दावा किया कि इसमें जूते लदे हुए हैं। हालांकि, जब कंटेनर की गहन जांच की गई तो वहां जूते का एक भी कार्टन नहीं मिला। इसके बजाय, कंटेनर के भीतर खाली कैरेट की आड़ में पंजाब निर्मित अवैध शराब के कुल 375 कार्टन छिपाकर रखे गए थे। शराब के इन कार्टनों को खाली कैरेट के नीचे विशेष रूप से बिछाए गए गद्दों के ऊपर रखा गया था। जांच अधिकारियों के अनुसार, गद्दों का इस्तेमाल मुख्य रूप से शराब के कार्टन से होने वाली आवाज को दबाने के लिए किया गया था ताकि तलाशी के दौरान किसी को भी वाहन के भीतर संदिग्ध सामान होने का शक न हो।
स्कैनर से बचने के लिए कंटेनर में किए गए थे बदलाव
जांच के दौरान इस तस्करी से जुड़ी कई चौंकाने वाली तकनीकी जानकारियां सामने आईं। जब्त किए गए कंटेनर पर राजस्थान का रजिस्ट्रेशन नंबर चस्पा था। इसके पिछले हिस्से के दोनों किनारों पर लोहे की लंबी और मोटी चादरें लगवाई गई थीं। उत्पाद विभाग को इस बात की प्रबल आशंका है कि कंटेनर में यह विशेष बदलाव बॉर्डर या जांच चौकियों पर इस्तेमाल होने वाले आधुनिक हैंड स्कैनर से शराब की खेप को छुपाने के लिए किया गया था। फिलहाल विभाग इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि इस कंटेनर में फेरबदल करने के पीछे किस मास्टरमाइंड की भूमिका थी।
रात में होनी थी बड़ी खेप की स्थानीय आपूर्ति
गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान हरियाणा के रहने वाले कंटेनर चालक कुलदीप और उपचालक रामचरण के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान दोनों ने यह स्वीकार किया कि वे पंजाब से शराब की यह खेप लेकर सीधे मुजफ्फरपुर पहुंचे थे। उत्पाद निरीक्षक सह थाना प्रभारी प्रकाश कुमार राम ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इस शराब की खेप की स्थानीय स्तर पर रात के समय में आपूर्ति की जानी थी। चालक को कड़े निर्देश दिए गए थे कि वह पूरे दिन कंटेनर को मैठी के पास ही खड़ा रखे, जिस वजह से वह वहां किसी स्थानीय व्यक्ति के आने का इंतजार कर रहा था।
उत्पाद विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि यह खेप पंजाब में असल तौर पर कहां से लोड की गई थी और मुजफ्फरपुर पहुंचने के बाद इसे किस स्थानीय धंधेबाज को सौंपा जाना था। पुलिस और उत्पाद विभाग की टीमें इस अवैध शराब के कारोबार के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज को खंगालने में जुटी हैं ताकि इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अन्य बड़े चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।



