नालंदा। जिले में विकास और जनहित के बीच टकराव की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। नूरसराय प्रखंड के जगदीशपुर-नारी तियारी गांव में प्रस्तावित ‘टूरिस्ट वे’ के निर्माण को लेकर प्रशासन और स्थानीय निवासियों के बीच गतिरोध इतना बढ़ गया कि मौके पर भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई। बिना किसी पूर्व सूचना के खेतों में बुलडोजर उतरते देख ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया, जिसके बाद काम को बीच में ही रोकना पड़ा।
बिना सूचना कार्रवाई से आक्रोश
ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि प्रशासन ने बिना किसी लिखित नोटिस या पूर्व सूचना के अचानक निर्माण कार्य शुरू कर दिया। जैसे ही भारी मशीनें और कर्मी खेतों में पहुंचे, महिलाएं और पुरुष विरोध में उतर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना उनकी निजी संपत्ति और आजीविका के एकमात्र साधन उनके खेतों को नष्ट करने की कोशिश की जा रही है। मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नूरसराय थाना पुलिस और अंचलाधिकारी (सीओ) दीपक कुमार को पहुंचना पड़ा।
आजीविका और घर का संकट
विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों का दर्द छलक उठा। कई परिवारों का कहना है कि उनके पास पहले से ही बहुत कम भूमि बची है और प्रस्तावित सड़क के नक्शे में उनके छोटे आशियाने भी आ रहे हैं। एक ग्रामीण ने भावुक होते हुए कहा, “हमारे पास महज कुछ कट्ठा जमीन है जिसमें कई हिस्सेदार हैं। अगर यह भी चली गई तो हम बच्चों को पालेंगे या रहने के लिए नई जमीन खरीदेंगे?” ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी मुआवजे की राशि मौजूदा बाजार दर से काफी कम है, जिससे विस्थापित होने वाले परिवारों का पुनर्वास लगभग असंभव है।
पैमाइश पर सवाल और सीओ का हस्तक्षेप
ग्रामीणों की सबसे बड़ी तकनीकी आपत्ति जमीन की पैमाइश (नापी) को लेकर है। उनका दावा है कि पूर्व में की गई नापी पूरी तरह दोषपूर्ण है और रसूखदारों को बचाने के लिए गरीबों की जमीन को जबरन अधिग्रहित किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ दीपक कुमार ने ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने स्वीकार किया कि ग्रामीणों के बीच एलाइनमेंट और पैमाइश को लेकर भ्रम की स्थिति है।
अंचलाधिकारी ने तुरंत आदेश दिया कि जमीन की फिर से पारदर्शी तरीके से नापी कराई जाएगी। उन्होंने मुआवजे (अवार्ड) की प्रक्रिया में तेजी लाने और विसंगतियों को दूर करने का भरोसा दिलाया। हालांकि, प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीण अस्थायी रूप से शांत जरूर हुए हैं, लेकिन गांव में तनावपूर्ण सन्नाटा पसरा हुआ है। जब तक दोबारा पैमाइश नहीं होती, तब तक निर्माण कार्य पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।
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