वीरेंद्र कुमार, नालंदा। नालंदा और शेखपुरा जिले की बड़ी आबादी के सामने इन दिनों आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बिहारशरीफ-कतरीसराय मुख्य मार्ग पर दरियापुर के समीप सकरी नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी की तलहटी में बनाया गया अस्थायी डायवर्सन पूरी तरह जलमग्न हो गया है। डायवर्सन डूबने के बाद दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से सीधा सड़क संपर्क बाधित हो गया है।
सुरक्षा दिवार को तोड़कर आवाजाही
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि आवागमन का दूसरा आसान विकल्प नहीं मिलने के कारण स्थानीय लोग प्रतिबंधित और जर्जर पुल पर बनी सुरक्षा दीवार का एक हिस्सा तोड़कर जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। दिनभर बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन और पैदल लोग इस कमजोर पुल से गुजर रहे हैं। नदी के तेज बहाव और पुल की जर्जर हालत को देखते हुए कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
अवैध खनन के चलते पुल का नींव कमजोर
बताया जाता है कि सकरी नदी पर बना मुख्य पुल करीब एक दशक पहले तैयार हुआ था। रख-रखाव की कमी और पिलरों के आसपास कथित अवैध बालू खनन के कारण पुल की नींव कमजोर होने की बात सामने आई है। करीब दो वर्ष पूर्व आई बाढ़ के बाद पुल के पिलरों में धंसाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने लगभग तीन महीने पहले पुल को खतरनाक घोषित कर वाहनों की आवाजाही बंद करा दी थी और दोनों छोर पर ईंट की दीवार बनवाई गई थी।
डायवर्सन डूबने से कई गांव प्रभावित
इसके बाद आवागमन जारी रखने के लिए नदी की तलहटी में अस्थायी कच्चा डायवर्सन बनाया गया था, लेकिन मंगलवार को नदी के बढ़े जलस्तर और तेज बहाव में यह डायवर्सन भी पूरी तरह डूब गया। डायवर्सन डूबने से नालंदा के मानपुर, पलनी, रहिंचा, कबीरपुर, मैरा और बरीठ समेत कई गांवों के अलावा शेखपुरा और बरबीघा के पश्चिमी इलाकों के ग्रामीण प्रभावित हुए हैं।
25 किमी लगाना पड़ता है अतिरिक्त चक्कर
ग्रामीणों के मुताबिक पहले बिहारशरीफ पहुंचने के लिए करीब 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन संपर्क टूटने के बाद गिरियक-पावापुरी मार्ग से करीब 35 से 40 किलोमीटर और अस्थावां होकर लगभग 25 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे मरीजों, विद्यार्थियों, दैनिक मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अनुमंडल पदाधिकारी ने दिया डायवर्सन बहाल का निर्देश
ग्रामीणों का कहना है कि तीन महीने बीत जाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से उनकी परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी मजबूरी में लोगों ने प्रतिबंधित पुल की सुरक्षा दीवार तोड़कर जोखिम भरी आवाजाही शुरू कर दी है।
मामले को लेकर बिहारशरीफ के अनुमंडल पदाधिकारी किसलय श्रीवास्तव ने बताया कि क्षेत्र की नदियों के बढ़ते जलस्तर और जलप्रवाह पर प्रशासन नजर बनाए हुए है। जर्जर पुल पर आवाजाही रोकने और डायवर्सन को बहाल कराने के लिए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है या उससे पहले ही इस जानलेवा रास्ते का स्थायी समाधान निकाला जाएगा?
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