दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। जिले की शांत सड़कें गुरुवार को अचानक ‘रणक्षेत्र’ में तब्दील हो गईं। मौका था क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन की विशाल ट्रैक्टर रैली का, जिसने पूरे शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। रसूलिया ओवरब्रिज से जब 300 से ज्यादा ट्रैक्टरों का ‘काफिला’ शहर के मुख्य बाजारों में घुसा तो चारों तरफ चक्काजाम जैसी स्थिति बन गई। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच घंटों जाम में फंसे राहगीरों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। हालांकि प्रशासन ने ऐन वक्त पर रूट डायवर्ट किया लेकिन तब तक शहर पूरी तरह थम चुका था।

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हक की लड़ाई या सियासत? हजारों लीटर डीजल धुएं में उड़ाने पर उठे सवाल

इस रैली के बाद अब शहर के चौराहों पर तीखी बहस छिड़ गई है। आम जनता और बुद्धिजीवियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जो किसान संगठन अक्सर डीजल की महंगाई और खेती के घाटे का रोना रोते हैं उन्होंने महज एक दिन के शक्ति प्रदर्शन के नाम पर हजारों लीटर डीजल धुएं में कैसे उड़ा दिया? लोग इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कम डीजल उपयोग’ करने की अपील को ठेंगा दिखाने वाली रैली कह रहे हैं। शहरवासियों का मानना है कि यह किसानों के हक की लड़ाई कम और सरकार को डराने का एक सियासी पैंतरा ज्यादा दिखाई दे रहा है।

कानून की उड़ी धज्जियां: नाबालिग चला रहे थे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर पर स्टंट

हद तो तब हो गई जब इस तथाकथित ‘शांतिपूर्ण’ रैली में यातायात और सुरक्षा नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। रैली में शामिल कई ट्रैक्टरों की स्टेयरिंग अनुभवी किसानों के बजाय नाबालिग बच्चों के हाथों में थमाई गई थी। इतना ही नहीं कुछ हुड़दंगी युवक चलते ट्रैक्टरों और हार्वेस्टरों पर चढ़कर जानलेवा स्टंट करते नजर आए जिससे कई बार बड़े हादसे होते-होते बचे।

खुद की महासभा में बदइंतजामी, बेहाल दिखे आम किसान

ट्रैक्टर रैली के बाद मंडी परिसर में एक महासभा का आयोजन किया गया था लेकिन यहां संगठन की अपनी बदइंतजामी की पोल खुल गई। भीषण गर्मी और उमस के बीच पंडाल में न तो पीने के पानी की सही व्यवस्था थी और न ही हवा का कोई इंतजाम था। नेताओं के भाषणों के बीच दूर-दराज से आए बेचारे आम किसान खुद ही बेहाल और परेशान नजर आए। ट्रैफिक डीएसपी संतोष मिश्रा के मुताबिक रैली को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

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किसानों ने प्रशासन को सौंपी 3 मुख्य मांगें

सभा के बाद किसान संगठन ने जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें प्रमुख मांगें शामिल हैं:

  • मूंग खरीदी से वंचित रह गए जिले के करीब 15 हजार किसानों के लिए तुरंत स्लॉट बुकिंग पोर्टल खोला जाए।
  • खाद वितरण में लागू पेचीदा ‘ई-टोकन’ व्यवस्था को तुरंत बंद किया जाए और सीधे पहचान पत्र (ID) दिखाकर खाद मुहैया कराई जाए।
  • चना और गेहूं की फसल का तुरंत भुगतान किया जाए और व्यापारियों पर बढ़ाया गया टैक्स वापस लिया जाए।

अब देखना यह है कि सड़कों पर मचे इस ‘ट्रैक्टर गदर’ के बाद सरकार किसानों की मांगों के आगे झुकती है या फिर हुड़दंग करने वालों पर सख्त रुख अपनाती है।

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