पटना। चीन के तिब्बत क्षेत्र से अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने पड़ोसी देश नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके के कई रिहायशी मकान, स्थानीय बाजार और संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, त्रिशूल नदी में हुए खतरनाक भूस्खलन के कारण स्थिति और अधिक विकट हो गई है। इस आपदा में कई लोगों के बहने की आशंका जताई जा रही है, जबकि कई गांव और महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाएं बाढ़ की चपेट में आकर बह चुकी हैं।

सीएम सम्राट चौधरी ने आपदा प्रबंधन के अधिकारियों के साथ बैठक की
बिहार में हाई अलर्ट और प्रशासन की तैयारी
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा का सीधा असर भारत के बिहार राज्य पर पड़ रहा है, जिसे लेकर प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। बगहा और आसपास के क्षेत्रों में गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने की संभावना है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से हाई अलर्ट जारी कर दिया है और वाल्मीकिनगर बराज की सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। संभावित खतरे को भांपते हुए गंडक बराज के सभी 36 फाटकों को पूरी तरह खोल दिया गया है ताकि पानी का बहाव बिना किसी रुकावट के निकल सके।
आपातकालीन बैठक और केंद्रीय नेतृत्व की नजर
बिहार में उत्पन्न इस संभावित बाढ़ संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को पूरी तरह हाई अलर्ट मोड में रहने और हर पल की स्थिति पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। हालात की सुगबुगाहट को देखते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी सीएम सम्राट चौधरी से फोन पर बातचीत कर पूरी स्थिति की जानकारी ली और हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
पुलिस प्रशासन की चेतावनी और बॉर्डर पर सख्ती
बगहा के पुलिस अधीक्षक (SP) राकेश कुमार ने तत्काल प्रभाव से एक आधिकारिक पत्र जारी कर मातहत पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी थानाध्यक्षों और पुलिस निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लाउडस्पीकर के माध्यम से आम जनता को गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ के प्रति सचेत करें। सुरक्षा के लिहाज से नेपाल बॉर्डर पर आवाजाही को आंशिक रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, जो भारतीय नागरिक नेपाल में फंसे हैं उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति दी जा रही है और नेपाल के नागरिकों को उनके वतन भेजा जा रहा है, लेकिन अन्य सभी प्रकार की अनावश्यक आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है।


