संजय पाटीदार, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने बोरवेल हादसों पर रोक लगाने और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई बोरवेल नीति और मानक संचालन प्रक्रिया के लिए एसओपी लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब नया बोरवेल खोदने से पहले पंजीयन और अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं खुले या अनुपयोगी बोरवेल को निर्धारित समय में बंद नही करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ जुर्माने और जेल की कार्रवाई की जाएगी।

नियमों का उल्लंघन करन पर होगी ये सख्त कार्रवाई

सरकार के नए नियमों के अनुसार, यदि बोरवेल में पानी नहीं निकलता है तो जमीन मालिक को 90 दिनों के भीतर उसे मिट्टी या कंक्रीट से स्थायी रूप से बंद करना होगा। इसके बाद बंद किए गए बोरवेल की फोटो पोर्टल पर अपलोड करना भी जरूरी होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर पहली बार 10 हजार रुपये और दूसरी बार 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। गंभीर लापरवाही की स्थिति में जेल की कार्रवाई भी हो सकेगी। यदि खुले बोरवेल के कारण कोई दुर्घटना होती है तो जमीन मालिक और बोरवेल ड्रिलिंग एजेंसी के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी। इतना ही नहीं दुर्घटना के बाद चलाए जाने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन पर होने वाला पूरा खर्च भी संबंधित दोषियों से ही वसूला जाएगा।

परख एप की सुविधा शुरू

आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ते बोरवेल में गिरने के मामलों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार ने नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए परख एप की सुविधा भी शुरू की है। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने आसपास खुले पड़े बोरवेल की फोटो अपलोड कर शिकायत दर्ज करा सकेगा। सरकारी जमीन पर खुले बोरवेल मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

नई नीति में हैंडपंप लगाने की प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाया गया है। आवेदन मिलने के तीन कार्य दिवस के भीतर कार्यपालन यंत्री को फाइल आगे भेजनी होगी। इसके बाद उपयंत्री तीन दिन के भीतर मौके का निरीक्षण कर 3 दिन के अंदर गांव जाकर गूगल मैप और घन पोर्टल की मदद से जगह की मार्किंग करेंगे। सभी रिपोर्ट मिलने के बाद एक सप्ताह के भीतर प्रस्ताव कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति के समक्ष रखा जाएगा जिससे पेयजल संबंधी कार्यो में पारदर्शिता और तेजी लाई जा सके।

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