शिवम मिश्रा, रायपुर। भारतमाला परियोजना में कथित अनियमितताओं का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब धमतरी जिले के सिवनीकला गांव में भी जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत एसीबी/ईओडब्ल्यू से की है। सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण बयान दर्ज कराने एसीबी/ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचे थे।

ग्रामीणों का आरोप है कि भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित जमीनों में फर्जी नामांतरण और अवैध बंटवारा कर करोड़ों रुपये का मुआवजा हासिल किया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि गांव के 17 से 18 खसरों को करीब 90 टुकड़ों में विभाजित कर फर्जी तरीके से रिकॉर्ड तैयार किए गए, जिससे पात्रता से अधिक लोगों को मुआवजे का लाभ दिलाया गया।

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अफसरों पर मिलीभगत के आरोप

शिकायत में पटवारी, जांच दल और डायवर्सन से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना प्रशासनिक सहयोग के इतने बड़े स्तर पर रिकॉर्ड में बदलाव संभव नहीं था। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) रायपुर से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

रिकॉर्ड में फेरबदल का दावा

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पूरे मामले में पूर्व मंत्री, भूमाफियाओं का संरक्षण है। पटवारी, जांच दल और डायवर्सन से जुड़े अधिकारियों ने मिलकर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2019 में प्रकाशित रिकॉर्ड के बाद दस्तावेजों में बदलाव कर फर्जी नामांतरण और बंटवारा किया गया। इसके आधार पर राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित जमीनों का करोड़ों रुपये का मुआवजा जारी कराया गया।

जांच में जुटी एसीबी/ईओडब्ल्यू

ग्रामीणों की शिकायत के बाद एसीबी/ईओडब्ल्यू मामले की जांच कर रही है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी।

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