कुमार इंदर, जबलपुर। महिला अधिवक्ता कविता दक्षिणामूर्ति की संदिग्ध मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर मृतका के पिता जिला न्यायालय में याचिका लगाने जबलपुर पहुंचे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान दूसरे पक्ष के वकील ने जवाब पेश करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की, जिसके बाद अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 जुलाई की तारीख तय की है। वहीं, पीड़ित पक्ष ने इसे महज एक हादसा मानने से साफ इनकार करते हुए इसे ‘सुनियोजित हत्या’ करार दिया है और पति के खिलाफ मर्डर का केस दर्ज कर ट्रायल चलाने की मांग दोहराई है।
क्या है पूरा मामला?
चेन्नई की रहने वाली महिला अधिवक्ता कविता की शादी 2 मार्च, 2025 को ओम नागार्जुन के साथ अरेंज मैरिज के तहत हुई थी। ओम नागार्जुन वर्तमान में जबलपुर के जैक (JAK) सेंटर में आर्मी अफसर के पद पर तैनात हैं। शादी के महज तीन महीने बाद ही 10 जून, 2025 को जबलपुर स्थित आर्मी क्वार्टर के बाथरूम में कविता बेहद संदिग्ध और बेहोशी की हालत में मिली थीं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ससुराल पक्ष का दावा था कि कविता की मौत दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से हुई है, लेकिन मृतका के शरीर और सिर पर मिली दो गंभीर चोटों ने इस कहानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
5 मिनट की दूरी और 3 घंटे का रहस्य!
पीड़ित पक्ष के परिजनों और उनके वकीलों ने कोर्ट के सामने पति के बयानों और अस्पताल पहुंचने के समय में एक बड़ा और चौंकाने वाला विरोधाभास (Time Gap) पेश किया है। परिजनों का आरोप है कि आर्मी क्वार्टर (घटनास्थल) से अस्पताल की दूरी बमुश्किल 5 मिनट की है लेकिन कविता को घर से अस्पताल पहुंचाने में 2 घंटे 39 मिनट (लगभग 3 घंटे) का समय लगा। परिजनों का सवाल है कि इस दौरान कविता के साथ क्या किया गया और अस्पताल ले जाने में इतनी देरी क्यों की गई? मृतका के सिर पर गहरी चोट के निशान थे, आंतरिक रूप से ‘हेड इंजुरी’ और ‘ब्लड क्लॉट’ पाया गया था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि रसूख के दम पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी मैनिपुलेट (प्रभावित) करने की कोशिश की गई है।
100 तोला सोना, XUV 700 देने के बाद भी दहेज की प्रताड़ना
मृतका के पिता ने आरोप लगाया है कि शादी तय होने के समय से ही ससुराल वालों की तरफ से दहेज की भारी-भरकम मांग रखी गई थी। लड़की वाले ने अपनी हैसियत से बढ़कर शादी में 100 तोला सोना और ₹25 लाख का कीमती नेकलेस दिया था। ससुराल पक्ष द्वारा हुंडई की ‘टक्सन’ (Tucson) गाड़ी की डिमांड की गई थी, लेकिन परिवार ने उन्हें महिंद्रा की ‘XUV 700’ कार दी थी। इस सब के बावजूद टक्सन गाड़ी और लाखों रुपयों की अतिरिक्त मांग को लेकर कविता को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था और मांग पूरी न होने पर उसकी हत्या कर दी गई।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल, अब तक नहीं हुई FIR
परिजनों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि घटना के लंबा समय बीत जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस ने इस मामले में अब तक कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की है। परिवार न्याय की गुहार लेकर गोराबाजार थाने के चक्कर काट रहा है, लेकिन सेना और रसूख के दबाव के चलते पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। यही वजह है कि थक-हारकर मृतका के पिता को न्याय के लिए जबलपुर जिला अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।

