इंदर कुमार, जबलपुर। मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल समेत अन्य प्रमुख नदियों में सीवेज और गंदा पानी मिलने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने राज्य सरकार को जल संरक्षण नियम 2016 का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एनजीटी ने प्रदेश के कलेक्टर्स के माध्यम से नदियों में गिर रहे सीवेज और अपशिष्ट के आंकड़ों का भौतिक सत्यापन कराने के आदेश जारी किए हैं।

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1315 नालों से नदियों में पहुंच रहा 637 MLD गंदा पानी

एनजीटी में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के 352 नगरीय निकायों के करीब 1,315 नालों के जरिए रोजाना लगभग 637 MLD गंदा पानी और अपशिष्ट विभिन्न जल निकायों व नदियों में छोड़ा जा रहा है। पवित्र और प्रमुख नदियों में बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी मिलने से जल प्रदूषण का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

मुख्य सचिव के शपथ पत्र और रिपोर्ट के आंकड़ों में 55.39 का अंतर

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र की समीक्षा की गई, जिसमें आंकड़ों का बड़ा अंतर सामने आया है।

दैनिक अपशिष्ट उत्पादन: राज्य में प्रतिदिन 8,467.87 टन अपशिष्ट (वेस्ट) निकलता है।

रिपोर्ट में दी गई जानकारी: रिपोर्ट में इसे 8,412.48 टन प्रतिदिन दर्शाया गया।

आंकड़ों में अंतर: समीक्षा में पाया गया कि प्रतिदिन निकलने वाले अपशिष्ट के आंकड़ों में 55.39 टन का अंतर आ रहा है।

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NGT का निर्देश- कलेक्टर्स करें आंकड़ों की जांच

एनजीटी ने इस अंतर को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि कलेक्टर्स के माध्यम से इन आंकड़ों का जमीनी स्तर पर सत्यापन कराया जाए। साथ ही अंतर की गहन जांच कर वास्तविक रिपोर्ट पेश की जाए, ताकि नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

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