वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी केंद्रों के आधुनिकीकरण और पोषण व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि GPS ट्रैकिंग और QR कोड से पोषण सामग्री की निगरानी, ट्रेसबिलिटी और पारदर्शिता बढ़ेगी.

वाराणसी. 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में सरकार ने लगभग 70 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप देने का काम किया है. इन केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता स्पष्ट है. चाहे केंद्र सरकार का संसाधन हो, राज्य सरकार का बजट हो या राज्य के अपने संसाधनों से होने वाला निर्माण, उनका सुदृढ़ीकरण हमारी टॉप प्रायोरिटी में है.

बुधवार को वाराणसी में रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह (9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026) के शुभारंभ पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने किया. इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पोषण मंत्री बेबी रानी मौर्य उपस्थित थीं.

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषाहार वितरण का स्थान नहीं रह गया है. वहाँ बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और उनके सर्वांगीण विकास पर एक साथ काम किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में देश के भविष्य की नींव सशक्त करने के लिए जो कदम उठाए, वही विजन आज पूरे देश में लागू हो रहा है. उन्होंने याद दिलाया कि जब वे जिलों का भ्रमण करते हैं तो अक्सर आंगनबाड़ी और बाल वाटिकाएँ देखने जाते हैं.

सीएम ने 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि तब आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर थे, ज्यादातर जगहों पर गंदगी थी, पेयजल और टॉयलेट की व्यवस्था नहीं थी. बच्चे अपना टाट लेकर जाते थे और समय पर रेसिपी उपलब्ध नहीं होती थी. एक शराब माफिया रेसिपी सप्लाई करता था.

स्मार्टफोन से रियल टाइम फीडिंग

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र विकसित किए जा रहे हैं. एक आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण पर लगभग 20 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं, ताकि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके.

आज हमारी आंगनबाड़ी बहनों के हाथ में स्मार्टफोन है. इस स्मार्टफोन के माध्यम से आप रियल टाइम में बच्चों और लाभार्थियों से संबंधित आँकड़ों की फीडिंग कर सकती हैं. इससे योजनाओं की निगरानी बेहतर हुई है और पारदर्शिता भी बढ़ी है.

मेरा आंगनबाड़ी, मेरी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहली बार देश के सामने यह स्पष्ट विजन रखा कि जब हम आजादी के 100 वर्ष पूरे करेंगे, तब हम कैसा भारत देखना चाहते हैं. हमारा संकल्प है कि 2047 का भारत स्वस्थ, सशक्त, सक्षम और विकसित भारत हो.

इस लक्ष्य को केवल बड़े शहरों से हासिल नहीं किया जा सकता. इसकी शुरुआत गाँवों और गलियों से होगी. गाँव के आंगनबाड़ी केंद्र और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय इस परिवर्तन के प्राथमिक केंद्र बनेंगे. इसीलिए प्रधानमंत्री जी का स्पष्ट संदेश है – मेरा आंगनबाड़ी, मेरी जिम्मेदारी.

प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड

वर्तमान में प्रदेश में लगभग एक लाख नब्बे हजार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं और 895 बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से इन केंद्रों की गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है. मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पोषण कार्यक्रमों को तकनीक से जोड़कर उन्हें अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का काम किया है.

पोषण सामग्री के परिवहन से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुँचने की प्रक्रिया में जीपीएस ट्रैकिंग की व्यवस्था की जा रही है, जिससे रियल टाइम में इसकी निगरानी संभव हो सके. उन्होंने प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड की व्यवस्था की जा रही है, जिससे उसकी ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित हो सके और यह पता लगाया जा सके कि पोषण सामग्री कहाँ से चली और किस लाभार्थी तक पहुँची.

इस तकनीक के माध्यम से पोषण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और पोषण की गुणवत्ता में सुधार आएगा. हमारा प्रयास है कि टेक-होम राशन और पोषण सामग्री को भी अधिक विविधतापूर्ण और पौष्टिक बनाया जाए. स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक खाद्य पदार्थों को इसमें शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है.