विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरा दुनिया की सबसे संक्रामक बीमारियों में से एक है और यह खांसी और छींक के माध्यम से फैलता है. बांग्लादेश के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने शुरू हुए खसरे के प्रकोप (Bangladesh Measles Crisis) में बांग्लादेश में 250 बच्चों की मौत हो चुकी है. पिछले एक सप्ताह से हर दिन तीन से पांच बच्चों की इस बीमारी से मौत हो रही है. बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में पूर्व अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के यात्रा प्रतिबंध की मांग की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनके शासन द्वारा टीकाकरण के निजीकरण को बढ़ावा देने के कारण ये संकट की स्थिति पैदा हुई है.

बांग्लादेश में 15 मार्च से अब तक खसरे और उसके जैसे लक्षणों के कारण 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस अवधि के दौरान खसरे के 28,000 मामले दर्ज किए हैं, जिसके बाद रविवार से पूरे देश में आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है.

बांग्लादेश में मार्च से अब तक खसरे के घातक प्रकोप से 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर बच्चे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार,  बांग्लादेश के सभी आठ डिवीजनों में फैले 64 जिलों में से 58 जिलों में खसरे का प्रकोप फैल चुका है. संगठन ने कहा कि लगभग 79% मामले पांच साल से कम उम्र के बच्चों में देखे गए हैं, जबकि द डेली स्टार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूरे देश में खसरे के कम से कम 91% मामले एक से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों में पाए गए हैं.

इसके साथ ही संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मोहम्मद यूनुस और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों के विदेश जाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है. एक वक्त पर टीकाकरण में दुनिया को पछाड़ने वाला बांग्लादेश इन दिनों खसरा (Measles) की सबसे घातक लहर से जूझ रहा है.

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील एम. अशरफुल इस्लाम ने सरकार को कानूनी नोटिस भेजकर मोहम्मद यूनुस और उनकी सरकार के सलाहकारों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की मांग की है. नोटिस में आरोप लगाया गया है कि अंतरिम सरकार ने खसरे के टीकाकरण अभियान को सरकारी क्षेत्र से हटाकर निजी क्षेत्र को सौंपने की ‘दुर्भावनापूर्ण’ कोशिश की थी.

उधर, खसरे के प्रकोप को रोकने में विफलता को लेकर हाईकोर्ट ने सोमवार को बांग्लादेश सरकार को नोटिस जारी किया है. अदालत ने पूछा है कि इस विफलता को अवैध क्यों न घोषित किया जाए. साथ ही अधिकारियों को दो हफ्ते के अंदर टीकों, सीरिंज और अन्य लॉजिस्टिक्स की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है.

आपको बता दें कि बांग्लादेश कभी अपने व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम (EPI) के लिए दुनिया भर में जाना जाता था. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि बांग्लादेश में उच्च टीकाकरण कवरेज का एक लंबा इतिहास रहा है.

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