पटना। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बिहार भर के हजारों दफादार-चौकीदार आज राजधानी पटना की सड़कों पर उतर आए हैं। बड़ी संख्या में जुटे इन प्रदर्शनकारियों ने गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का ऐलान किया है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
प्रदर्शन का मार्ग और प्रशासन की घेराबंदी
प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से एकत्रित होकर जेपी गोलंबर और व्यस्त डाकबंगला चौराहे से गुजरते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की योजना बना रहे हैं। भीड़ की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पूरे रूट को छावनी में तब्दील कर दिया है। गांधी मैदान से लेकर सीएम आवास तक चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों का साफ कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन कानून-व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी।
फरवरी की लाठीचार्ज की घटना बनी सबक
इस प्रदर्शन को लेकर प्रशासन इसलिए भी अतिरिक्त सतर्क है क्योंकि फरवरी में हुए इसी तरह के आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था। उस समय प्रदर्शनकारियों ने डाकबंगला चौराहे पर बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की थी, जिसे रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा था। इस संघर्ष में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे और एक आंदोलनकारी को गंभीर चोटें आई थीं। पुरानी घटना को दोहराने से रोकने के लिए इस बार प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं।
दफादार-चौकीदारों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी वाजिब मांगों को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। इनमें मुख्य रूप से उनकी सेवा शर्तों में सुधार, वेतन वृद्धि और विभिन्न विभागीय लाभ शामिल हैं। आंदोलनकारियों का तर्क है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
फिलहाल, पटना की प्रमुख सड़कों पर भारी भीड़ और पुलिस की मौजूदगी से आवागमन प्रभावित हो रहा है। प्रशासन लगातार प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित रखने और अप्रिय स्थिति से बचने के लिए निगरानी कर रहा है। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से कोई बातचीत होती है या स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।

