बिहार की राजधानी पटना में आवासीय परिसरों के भीतर व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को लेकर उत्पन्न हुए गंभीर विवाद के समाधान की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। नगर निगम द्वारा हजारों मकान मालिकों को थमाए गए नोटिस के बाद लगातार बढ़ती चिंताओं और जनाक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मामले के व्यावहारिक व जनहितकारी समाधान हेतु एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी संभालेंगे समिति की कमान
पटना नगर निगम की कार्रवाई से प्रभावित नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और निष्पक्ष समाधान के लिए गठित इस विशेष समिति की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी करेंगे। इसके साथ ही, इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक पैनल में नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश कुमार मिश्रा को समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।
समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव और विधान पार्षद संजय कुमार सिंह को शामिल किया गया है। यह समिति पटना नगर निगम द्वारा जारी किए गए नोटिसों से जुड़े प्रत्येक कानूनी व व्यावहारिक पहलू का सूक्ष्म अध्ययन करेगी, जिसके पश्चात एक जनहितकारी समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल की पहल और मुख्यमंत्री से मुलाकात
नगर निगम की नोटिस से उत्पन्न असमंजस की स्थिति को दूर करने के लिए हाल ही में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में विधायक संजीव चौरसिया, रत्नेश कुशवाहा, श्याम रजक और संजय गुप्ता ने प्रमुखता से हिस्सा लिया।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष आम नागरिकों और स्थानीय कारोबारियों की व्यावहारिक परेशानियों को विस्तार से रखा। उन्होंने ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि निगम की इस अचानक और व्यापक कार्रवाई से मध्यमवर्गीय परिवारों व छोटे व्यापारियों को हो रही असहजता से राहत दिलाई जाए, जिसके बाद सरकार ने यह त्वरित और सकारात्मक कदम उठाया।
26 हजार से अधिक मकानों को जारी हुए हैं नोटिस
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटना नगर निगम ने शहर के सभी छह प्रशासनिक अंचलों में आवासीय भवनों के कमर्शियल इस्तेमाल की पहचान की है। इसके आधार पर कुल 26,745 मकान मालिकों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया युद्धस्तर पर शुरू की गई है। निगम प्रशासन की ओर से प्रत्येक वार्ड में रोजाना 100 से अधिक नोटिस प्रेषित करने का सख्त लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे कारोबारियों में भारी चिंता व्याप्त है।
यह पूरी कार्रवाई मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट की कड़ी सख्ती के बाद तीव्र हुई है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत एक रिपोर्ट में पटना में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े 26,745 मामलों का खुलासा हुआ था, जिसे शीर्ष अदालत ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली में बड़ी लापरवाही करार दिया था। अब इस उच्चस्तरीय समिति के गठन से प्रभावित लोगों को एक उचित और संतुलित समाधान मिलने की उम्मीद जग गई है।


