कुंदन कुमार, पटना। बिहार में शहरीकरण और आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि सरकार की नई टाउनशिप योजनाओं के तहत किसानों या भूस्वामियों की जमीन का जबरन अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ लैंड पूलिंग की नीति पर आगे बढ़ रही है, जिससे विकास के साथ-साथ किसानों के हितों की भी पूरी रक्षा हो सके।

​पाटलिपुत्र टाउनशिप का प्रारूप और जनता के सुझाव

​राज्य में पहली बार टाउनशिप योजनाओं पर चरणबद्ध तरीके से काम शुरू हुआ है। इसी कड़ी में महत्वाकांक्षी पाटलिपुत्र टाउनशिप योजना का प्रारूप प्रकाशित कर दिया गया है। यह प्रारूप अगले दो महीनों तक आम जनता, किसानों और हितधारकों के सुझाव तथा आपत्तियों के लिए खुला रहेगा। हाल ही में इस योजना को लेकर आयोजित संवाद सत्र में विभिन्न किसानों और स्थानीय लोगों ने अपनी बात रखी। इस दौरान कुछ किसानों ने अपनी जमीन देने को लेकर असमंजस और चिंता जाहिर की थी, जिसका सरकार ने सकारात्मक और स्पष्ट जवाब दिया है।

​लैंड पूलिंग नीति: किसानों को मिलेगा 55 प्रतिशत विकसित हिस्सा

​मंत्री नीतीश मिश्रा ने किसानों की शंकाओं को दूर करते हुए कहा कि जमीन लोगों की भावनाओं और आजीविका से जुड़ा एक संवेदनशील विषय है। सरकार किसी भी किसान की मर्जी के खिलाफ जाकर जबरन जमीन नहीं छीनेगी। इस योजना के तहत लैंड पूलिंग मॉडल अपनाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत किसानों द्वारा दी गई कुल जमीन का 55 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह विकसित करके वापस किसानों को ही लौटाया जाएगा। यह विकसित जमीन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी, जिससे भूस्वामियों की संपत्ति का मूल्य कई गुना बढ़ जाएगा।

​असंतुष्ट किसानों के गांवों को छोड़ने का प्रावधान

​सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि जो किसान या ग्रामीण इस योजना का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं और अपनी जमीन नहीं देना चाहते हैं, उनकी जमीनों को जबरन इस प्रोजेक्ट में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे असंतुष्ट गांवों और उनके पारंपरिक स्वरूप को पूरी तरह अछूता छोड़ दिया जाएगा। योजना में केवल उन्हीं क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा जहां के लोग स्वेच्छा से अपनी सहमति देंगे।

​संवाद और जन-जागरूकता पर जोर

​चूंकि नए शहरी विकास प्रोजेक्ट्स को लेकर लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं रहती हैं, इसलिए विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर गांवों में सीधा संवाद स्थापित करेंगे। अधिकारियों की टीमें सीधे ग्रामीणों से मिलकर पाटलिपुत्र टाउनशिप योजना के लाभ, नियमों और प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देंगी। सरकार का मानना है कि जब लोगों तक सही और स्पष्ट जानकारी पहुंचेगी, तो सभी भ्रांतियां दूर होंगी और नागरिक खुद विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए आगे आएंगे।

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