कुंदन कुमार, पटना। शहर की सड़कों पर पिछले 19 दिनों से चल रहा पीएचडी धारकों का आमरण अनशन अब एक बड़े और उग्र आंदोलन का रूप ले चुका है। बुधवार को अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने लोकभवन की ओर मार्च निकाला। इस आंदोलन की सबसे बड़ी सुर्खी बने कुमुद पटेल, जो लगातार 18 दिनों से अनशन पर हैं। अपनी खराब शारीरिक स्थिति के बावजूद, वह व्हील चेयर पर अपने सहयोगियों के साथ लोकभवन मार्च में शामिल होने पहुंचे।
​कुमुद पटेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक उनका यह अनशन और आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। हालांकि, आज सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात का आश्वासन मिला है, जिससे अब सभी की निगाहें आगे की बातचीत पर टिकी हैं।

​आर ब्लॉक चौराहे पर हंगामा और पुलिस सख्ती

​लोकभवन मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी काफी उग्र नजर आए। आर ब्लॉक चौराहे पर पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग पर प्रदर्शनकारी चढ़ गए और उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
​स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पटना जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया:

  • ​भारी सुरक्षा बल: आर ब्लॉक से लेकर लोकभवन और राजभवन मार्ग तक भारी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट तैनात किए गए।
  • ​कड़ा पहरा: अकेले आर ब्लॉक चौराहे पर 100 से अधिक सुरक्षा जवानों को तैनात किया गया था।
  • ​वाटर कैनन का प्रयोग: प्रदर्शनकारियों को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर वाटर कैनन व अन्य दंगा-रोधी उपकरण तैयार रखे गए थे।

​प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें और दर्द

​प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि वे लंबे समय से उच्च शिक्षा व्यवस्था को संभाल रहे हैं, लेकिन सरकार के नए नियमों के कारण उनके भविष्य पर तलवार लटक रही है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • ​यूजीसी नियमों का पालन: प्रोफेसरों की नियुक्ति में यूजीसी के मानकों और दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए।
  • ​आयु सीमा में छूट: अभ्यर्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में आयु सीमा को बढ़ाया जाए।
  • ​नए नियमों का विरोध: राज्य सरकार के उन नए प्रावधानों को तुरंत वापस लिया जाए, जो अतिथि शिक्षकों के भविष्य के प्रतिकूल हैं।
  • ​स्थाई रोजगार की मांग: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें 11 महीने के अनुबंध पर अतिथि सहायक प्राध्यापक के रूप में रखा गया था, लेकिन वे पिछले 8 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अनिश्चितता का जीवन जी रहे हैं।

​राजनीतिक समर्थन और आगे की हलचल

​इस आंदोलन को अब विभिन्न राजनीतिक दलों और शिक्षकों का भी समर्थन मिलने लगा है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इन पीएचडी धारकों का समर्थन किया है और सरकार से अतिथि शिक्षकों (गेस्ट फैकल्टी) को नियुक्ति में प्राथमिकता देने की मांग की है।
​प्रशासनिक सख्ती और पुलिस बल के कड़े पहरे के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं। उनका कहना है कि वे लोग हैं जो शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर रखते हैं, और सरकार उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखाने का प्रयास कर रही है। इस घटनाक्रम ने राजधानी पटना की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल को बेहद तेज कर दिया है।