पटना। राजधानी पटना के महेंद्रू इलाके में साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड फौजी को अपना शिकार बनाते हुए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 3.30 लाख रुपये की ठगी की है। ठगों ने पीड़ित को 10 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और देशद्रोह के झूठे केस का डर दिखाकर रुपये ऐंठ लिए। अपनी भतीजी की शादी के लिए जमा की गई जीवनभर की कमाई लुट जाने के बाद बुजुर्ग फौजी गहरे सदमे में हैं और उन्होंने आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाने की भी कोशिश की।
बैंक अधिकारी बनकर शुरू हुआ खेल
ठगी की शुरुआत एक फोन कॉल से हुई। कॉलर ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए दावा किया कि दिल्ली के चांदनी चौक स्थित आईसीआईसीआई बैंक में फौजी के नाम पर एक खाता खुला है, जिसमें 6.80 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि जमा है। जब पीड़ित ने इस खाते से किसी भी संबंध से इनकार किया, तो ठगों ने असली जाल बिछाया।
देशद्रोह के नाम पर डिजिटल अरेस्ट का डर
कुछ देर बाद दूसरे कॉलर ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर फौजी को डराया कि उनके बैंक खाते का उपयोग अपराधियों द्वारा किया गया है और अब उन पर देशद्रोह का गंभीर मुकदमा दर्ज होगा। इस डर से पीड़ित को लगातार 10 दिनों तक फोन पर ही डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। उन्हें बाहर जाने या किसी से बात करने से मना कर दिया गया।
पुलिस की वर्दी और निगरानी का झांसा
ठग इतने शातिर थे कि उन्होंने पीड़ित के घर की तस्वीरें खींचकर उन्हें भेजीं ताकि उन्हें यकीन हो जाए कि वे निगरानी में हैं। इतना ही नहीं, अपराधियों ने पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल भी किए और एक व्यक्ति को उनके घर के बाहर भी भेजा। पूरी तरह घिर चुके फौजी ने खुद को बचाने के लिए अपनी जमा-पूंजी 3.30 लाख रुपये आरटीजीएस (RTGS) के जरिए जालसाजों के खाते में ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस की अपील
ठगी का अहसास होने के बाद 17 दिनों तक घर में गुमसुम रहे पीड़ित ने अब साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंक, पुलिस या ईडी अधिकारी बनकर डराने वाले लोगों के बहकावे में न आएं। किसी भी संदेहास्पद स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को सूचना दें।

