पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित 650 साल पुरानी ऐतिहासिक अदीना मस्जिद को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. जहां हिंदू संगठन इसे प्राचीन शिव मंदिर पर बनी होने का दावा कर रहे हैं. वे मस्जिद के बाहर शिवलिंग स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर नाम के एक संगठन ने मस्जिद के परिसर के बाहर एक हिंदू संगठन ने शिवलिंग स्थापित कर पूजा करने की घोषणा की है.
वहीं मुस्लिम नेताओं ने इस कदम पर आपत्ति जताई है. प्रशासन से यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है. बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान ने जब इस मस्जिद में सफाई के बाद तस्वीरें साझा की थीं तब काफी विवाद खड़ा हो गया था.
पश्चिम बंगाल के मालदा स्थित 14वीं सदी की अदीना मस्जिद के परिसर के बाहर एक हिंदू संगठन ने शिवलिंग स्थापित कर पूजा करने की घोषणा की है. हुगली जिले के तारकेश्वर से लाए गए इस 1.5 टन वजनी शिवलिंग को सावन के दूसरे सोमवार पर स्थापित करने की योजना है. इस घोषणा के बाद इलाके में धार्मिक और सामाजिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है.
दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों और बीजेपी नेताओं का दावा है कि यह मस्जिद भगवान शिव को समर्पित प्राचीन ‘आदिनाथ मंदिर’ को ध्वस्त करके बनाई गई थी.
दूसरी ओर, कुछ मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई है. उनका कहना है कि ऐतिहासिक और संवेदनशील स्थल होने के कारण वहां किसी भी नए धार्मिक आयोजन या निर्माण से पहले प्रशासन को यथास्थिति बनाए रखनी चाहिए.
भाजपा द्वारा संसद में मांग उठाए जाने के महीनों बाद बीजेपी नेता मंदिर होने के दावे को मजबूत करने के लिए शिवलिंग स्थापित करने की योजना बना रहे हैं.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इसे एक संरक्षित स्मारक मानता है और इसके भीतर किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि पर रोक है. स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है
प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. दोनों पक्षों की अलग-अलग राय सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं.
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