राजधानी दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए एक बड़ी योजना को मंजूरी मिल गई है। दिल्ली सरकार ने रिंग रोड(Ring Road) पर करीब 55 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर (elevated corridor ) के निर्माण की योजना के पहले चरण को स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना के तहत रिंग रोड पर कुल 6 एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाने की योजना है। पहले चरण में 3 कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है, जिसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। सरकार का मानना है कि इन एलिवेटेड कॉरिडोर के बनने से रिंग रोड पर वाहनों का दबाव कम होगा और यात्रियों को जाम से राहत मिलेगी। साथ ही, प्रमुख हिस्सों में यात्रा का समय घटाने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने आजादपुर से आश्रम चौक तक 3 एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना तैयार की है। इसमें यमुना नदी पर बनने वाले 2 नए पुल भी शामिल हैं। दिल्ली की करीब 55 किलोमीटर लंबी रिंग रोड पर रोजाना लाखों वाहन गुजरते हैं। व्यस्त समय में यहां भारी ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। कई छोटे फ्लाईओवर बनने के बावजूद सुबह और शाम के समय वाहन चालकों को लंबे जाम का सामना करना पड़ता है। जाम की समस्या को खत्म करने के लिए PWD ने रिंग रोड पर कुल 6 एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई थी। इसके लिए विभाग ने विस्तृत अध्ययन कराया। अध्ययन में सामने आया कि आजादपुर से आश्रम चौक तक 3 एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण अपेक्षाकृत आसान होगा। वहीं, बाकी 3 कॉरिडोर के निर्माण में जगह की कमी और मेट्रो नेटवर्क जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। PWD अब पहले चरण में उन्हीं हिस्सों पर काम आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, जहां निर्माण में कम बाधाएं हैं।
DPR तैयार करवा रहा PWD
अध्ययन के आधार पर तय किया गया है कि पहले चरण में आजादपुर से आश्रम चौक तक इन कॉरिडोर का निर्माण कराया जाएगा। लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर सहमति दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, डीपीआर तैयार होने और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इस साल के अंत तक एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। दिल्ली की करीब 55 किलोमीटर लंबी रिंग रोड पर रोजाना भारी यातायात दबाव रहता है। सरकार का मानना है कि एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से वाहनों की आवाजाही आसान होगी और व्यस्त समय में लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिलेगी।
यमुना पर बनेंगे 2 नए पुल
प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना में यमुना नदी पर 2 नए पुल बनाए जाएंगे। इन पुलों की मदद से एलिवेटेड कॉरिडोर का रास्ता तय किया जाएगा और वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाया जाएगा। योजना के अनुसार, पहला पुल चंदगीराम अखाड़े के पास बनाया जाएगा। इस पुल के जरिए एलिवेटेड कॉरिडोर यमुना के दूसरी ओर पहुंच जाएगा। इसके बाद कॉरिडोर नदी के पार से होकर आगे बढ़ेगा। वहीं, दूसरा पुल लोहे वाले पुल के पास बनाया जाएगा। इस पुल के जरिए एलिवेटेड कॉरिडोर दोबारा रिंग रोड से जुड़ जाएगा। इससे वाहन चालकों को रिंग रोड के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से बचते हुए बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
PWD के अनुसार, कॉरिडोर बनने के बाद वाहन करीब 45 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति से चल सकेंगे। इससे सफर का समय कम होगा और जाम की समस्या से राहत मिलेगी। परियोजना से पर्यावरण को भी फायदा पहुंचने का दावा किया गया है। अनुमान के मुताबिक, एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद हर साल करीब 48,782 टन कार्बन उत्सर्जन कम हो सकता है, जिससे दिल्ली के प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, रिंग रोड पर सड़क हादसों में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
मौजूदा रिंग रोड पर यातायात का दबाव
रिंग रोड से रोजाना 4 लाख से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। व्यस्त समय में वाहनों की औसत रफ्तार घटकर करीब 23 किलोमीटर प्रति घंटे रह जाती है। दिल्ली के PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा कि रिंग रोड पर बनने वाला एलिवेटेड कॉरिडोर जाम मुक्त सफर की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है। उन्होंने कहा कि रिंग रोड दिल्ली की सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सड़कों में से एक है और कॉरिडोर बनने से लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
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